सुप्रीम कोर्ट ने UGC के विवादास्पद नियमों पर रोक लगाई

UGC Regulations

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए विवादास्पद समता (इक्विटी) नियमों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब छात्रों के बीच इन नियमों को लेकर भारी नाराज़गी बढ़ रही थी।

नए नियमों में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के सदस्यों के खिलाफ उत्पीड़न होने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया था, जबकि सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगरी) के छात्रों के लिए ऐसे किसी आश्वासन को शामिल नहीं किया गया था। इस असमान श्रेणीबद्ध भेदभाव के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा नियम अस्पष्ट हैं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने रेगुलेशन चुनौती याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि UGC के नए नियम अस्पष्ट हैं और भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा में समानता सुनिश्चित नहीं करते हैं।

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नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों का निवारण करने और समता को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटी बनाने की आवश्यकता थी। यह नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे।

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UGC (इक्विटी को बढ़ावा) रेगुलेशन 2026 क्या था?
UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए “इक्विटी को बढ़ावा देना” नाम से नया रेगुलेशन जारी किया था, जो UGC (हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में इक्विटी को बढ़ावा देना) रेगुलेशन, 2026 के नाम से जाना जा रहा था। इसके तहत यह जरूरी किया गया था कि इक्विटी कमेटियों में निम्न समूहों के प्रतिनिधि शामिल हों:

  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
  • अनुसूचित जाति (SC)
  • अनुसूचित जनजाति (ST)
  • दिव्यांगजन
  • महिलाएं
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ये नए रेगुलेशन 2012 के पुराने UGC रेगुलेशन की जगह लेने वाले थे, जिनमें मुख्यतः सलाह-मशवरा करने का प्रावधान था।

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याचिका में क्या कहा गया?
नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया कि भेदभाव की शिकायतों को केवल OBC, SC और ST तक सीमित करने से सामान्य श्रेणी के छात्रों को उनकी जाति, लिंग, धर्म या अन्य पहचान के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा नहीं मिलती।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार UGC ने सामान्य या गैर-आरक्षित श्रेणी के छात्रों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण से वास्तव में वंचित कर दिया है, जबकि उन्हें भी समान प्रकार के उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं
नए UGC नियमों के विरोध में कई शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और युवा समूहों ने विभिन्न जिलों और विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को तुरंत रद्द करने और उच्च शिक्षा में समता तथा न्याय को सुनिश्चित करने की मांग की है।

अब क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाई है और केंद्र तथा UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब अदालत में सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि क्या UGC को नियमों में संशोधन करना चाहिए और किस प्रकार समता संघर्ष से जुड़े सभी समूहों को समान स्तर पर सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।

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