धनबाद बयान पर सियासत तेज: बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को घेरा, कांग्रेस ने किया पलटवार
Ranchi : झारखंड की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। हेमंत सोरेन के धनबाद में दिए गए बयान पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने तीखा हमला बोला है, तो वहीं कांग्रेस भी इस राजनीतिक बहस में कूद पड़ी है। मुद्दा है आउटसोर्सिंग कंपनियों और रोजगार का।
क्या था मुख्यमंत्री का बयान?
धनबाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं से कहा था कि अगर आउटसोर्सिंग कंपनियां स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं देतीं, तो उन्हें रोजगार के लिए उन कंपनियों पर “कब्जा” कर लेना चाहिए।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
बाबूलाल मरांडी का सीधा हमला
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बयान भ्रामक है और युवाओं को गुमराह करने वाला है। उन्होंने दावा किया कि आज की आउटसोर्सिंग कंपनियों में लगभग 95% काम स्वचालित मशीनों से होता है। ऐसे में इन कंपनियों पर कब्जा करने से बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने का दावा वास्तविकता से दूर है।
मरांडी ने आगे कहा कि अगर सरकार सच में आदिवासियों और स्थानीय लोगों को रोजगार देना चाहती है, तो शराब दुकानों का संचालन स्थानीय लोगों को क्यों नहीं दिया गया? उनके अनुसार राज्य में लगभग 1500 शराब दुकानों से हजारों परिवारों को रोजगार मिल सकता था।
बालू घाट और खनन पर भी उठाए सवाल
मरांडी ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले सुझाव दिया था कि बालू घाटों का संचालन ग्राम सभाओं के माध्यम से कराया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले।
लेकिन, उनके अनुसार, सरकार ने यह काम खनन माफियाओं और बाहरी तत्वों को सौंप दिया। उनका दावा है कि अगर स्थानीय मॉडल अपनाया जाता तो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार मिल सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के छह साल के कार्यकाल में रोजगार सृजन के मोर्चे पर ठोस उपलब्धि नहीं दिखी।
“10,000 करोड़ गायब” का भी आरोप
मरांडी ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के खजाने से 10,000 करोड़ रुपये की राशि गायब है। उन्होंने दावा किया कि वित्त मंत्री के निर्देश के बावजूद मामले की पूरी जांच नहीं हुई और फाइलें लंबित हैं।
उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से इस मामले की जांच की मांग भी की।
कांग्रेस का पलटवार
मरांडी के आरोपों पर झारखंड कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश नेताओं ने कहा कि भाजपा के नेता जनता द्वारा नकारे जा चुके हैं और अब सिर्फ बयानबाज़ी कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झारखंड गठन के बाद लंबे समय तक भाजपा की सरकार रही, उस दौरान हुए घोटालों का हिसाब क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने मरांडी पर “सोशल मीडिया की राजनीति” करने का आरोप लगाया।
सियासी टकराव और तेज होगा?
धनबाद के मंच से दिया गया एक बयान अब राज्यस्तरीय राजनीतिक बहस में बदल चुका है। एक तरफ मुख्यमंत्री के बयान को रोजगार के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दे रहा है।
स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और गरमाने वाला है।






