माण्डर में आजीविका न्याय सलाह केंद्र का उद्घाटन, 115 महिला उद्यमियों को मिला आर्थिक संबल
माण्डर प्रखंड: रांची जिले के माण्डर प्रखंड में आज ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। माण्डर आजीविका न्याय सलाह केंद्र, एकल सुविधा केंद्र तथा माण्डर आजीविका महिला संकुल संगठन के कार्यालयों का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दीपिका पाण्डेय सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री, झारखंड सरकार ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और अधिकार-संपन्न बनाने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है।
115 महिला उद्यमियों को मिला ₹59.72 लाख का सहयोग
कार्यक्रम के दौरान OSF परियोजना के अंतर्गत सखी मंडल से जुड़ी 115 महिला उद्यमियों को कुल ₹59,72,000 की सीईएफ (कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड) राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही लाभुक महिलाओं के बीच आजीविका से जुड़ी विभिन्न परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया। मंत्री ने कहा कि यह आर्थिक सहायता ग्रामीण महिलाओं को स्वरोज़गार, आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

न्याय और आजीविका तक एकीकृत पहुंच
दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि आजीविका न्याय सलाह केंद्र और एकल सुविधा केंद्र ग्रामीण महिलाओं के लिए न्याय, आजीविका और सरकारी योजनाओं तक सरल, सुलभ और एकीकृत पहुंच का मजबूत माध्यम बनेंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
जेंडर शपथ से समानता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जेंडर शपथ ली, जिसके माध्यम से सामाजिक समानता, सम्मान और जागरूकता का संदेश दिया गया। मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच और सामाजिक व्यवहार में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।

महिला केंद्रित योजनाएं ग्रामीण विकास की नींव
इस अवसर पर झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिला केंद्रित योजनाएं राज्य के समग्र ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं और इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, आजीविका मिशन से जुड़े प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि झारखंड में ग्रामीण विकास की धुरी अब सशक्त महिलाएं बन रही हैं।






