झारखंड में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम: रिनपास में लगेगी अत्याधुनिक dTMS मशीन

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रांची: झारखंड में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत रांची स्थित रिनपास में अत्याधुनिक dTMS मशीन की स्थापना का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सीसीएल, रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास) और रोटरी फाउंडेशन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह पहल न केवल राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक रोगों से जूझ रहे हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण भी साबित होगी।

अत्याधुनिक dTMS तकनीक: बिना ऑपरेशन के होगा इलाज
इस समझौते के तहत रिनपास में BrainsWay dTMS System (Deep Transcranial Magnetic Stimulation) मशीन स्थापित की जाएगी। यह तकनीक पूरी तरह से नॉन-इनवेसिव (बिना सर्जरी) है और मस्तिष्क के गहरे हिस्सों को लक्षित कर न्यूरल नेटवर्क को सक्रिय करती है। इस मशीन में H1, H4 और H7 कॉइल्स की सुविधा होगी, जो विभिन्न मानसिक बीमारियों के इलाज में उपयोगी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (बायलेटरल) को प्रभावित कर बेहतर परिणाम देती है।

किन बीमारियों में मिलेगी राहत?
यह आधुनिक dTMS तकनीक कई गंभीर मानसिक रोगों के इलाज में कारगर साबित हो रही है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • अवसाद (Depression)
  • ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD)
  • निकोटीन एडिक्शन (Smoking Addiction)
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खास बात यह है कि यह तकनीक US Food and Drug Administration (FDA) द्वारा अनुमोदित है, जो इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

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करीब 2 करोड़ की परियोजना, सीसीएल करेगा पूरा खर्च
इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹1.98 करोड़ (AMC सहित) निर्धारित की गई है, जिसका पूरा वित्तीय वहन सीसीएल द्वारा CSR के तहत किया जाएगा। यह कदम यह दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हर साल 600 से ज्यादा मरीजों को मिलेगा लाभ
इस परियोजना के जरिए हर वर्ष 600 से अधिक गंभीर मानसिक रोगियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। इसके साथ ही, इस उपचार को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) और झारखंड राज्य स्वास्थ्य योजना से जोड़ने की भी योजना है, जिससे आम लोगों को कम लागत में यह अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध हो सकेगा।

त्रिपक्षीय समझौता: सामूहिक प्रयास का उदाहरण
इस MoU पर हस्ताक्षर के दौरान सीसीएल के महाप्रबंधक (SD एवं CSR) सिद्धार्थ शंकर लाल, रिनपास की निदेशक डॉ. जयंती सिमलाई और रोटरी फाउंडेशन के प्रतिनिधि ललित त्रिपाठी एवं गौरव बगरोय मौजूद रहे। यह समझौता सरकारी संस्थान, कॉर्पोरेट सेक्टर और सामाजिक संगठन के बीच समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है, जो समाज के लिए ठोस परिणाम देने की क्षमता रखता है।

झारखंड में मानसिक स्वास्थ्य को मिलेगा नया आधार
झारखंड जैसे राज्य में, जहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और सुविधाएं दोनों सीमित रही हैं, यह पहल एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। dTMS जैसी अत्याधुनिक तकनीक के आने से न केवल इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि मरीजों का भरोसा भी बढ़ेगा और उन्हें राज्य से बाहर जाने की जरूरत कम पड़ेगी

सीसीएल की यह CSR पहल सिर्फ एक मशीन की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना आने वाले समय में हजारों लोगों को नई जिंदगी देने में सहायक बन सकती है और राज्य को हेल्थकेयर के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।

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