बढ़ती पेट्रोल कीमतों का गिग वर्कर्स की कमाई पर असर, डोर-टू-डोर सेवाओं की रफ्तार धीमी
महंगे पेट्रोल से बढ़ा आर्थिक दबाव
रांची : Ranchi में पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब गिग वर्कर्स और डोर-टू-डोर डिलीवरी सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन फूड, ग्रॉसरी और अन्य होम डिलीवरी सेवाओं से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि ईंधन खर्च तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उनकी आय और इंसेंटिव में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके कारण डिलीवरी पार्टनर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है और इसका असर अब आम लोगों तक भी पहुंचने लगा है।
ऑनलाइन सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता
शहरों में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं। नौकरीपेशा लोग समय बचाने के लिए घर पर खाना और जरूरी सामान मंगाते हैं। वहीं छात्र, हॉस्टल में रहने वाले युवा, बुजुर्ग और बीमार लोग भी दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की होम डिलीवरी पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। लेकिन पेट्रोल महंगा होने के कारण अब इन सेवाओं की रफ्तार प्रभावित होने लगी है।
ऑर्डर पर निर्भर होती है कमाई
डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि उनकी आय पूरी तरह ऑर्डर की संख्या और लक्ष्य पूरा करने पर निर्भर करती है। उन्हें कोई निश्चित मासिक वेतन नहीं मिलता। हर सफल डिलीवरी पर बेस फीस दी जाती है और दूरी बढ़ने पर अतिरिक्त भुगतान मिलता है। इसके अलावा पीक आवर और तय संख्या में ऑर्डर पूरे करने पर बोनस भी मिलता है। हालांकि बढ़ते पेट्रोल खर्च ने इस कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है।
25 हजार कमाई में 7 हजार तक खर्च
गिग वर्कर्स के अनुसार एक डिलीवरी पार्टनर औसतन 22 से 25 हजार रुपये प्रति माह तक कमा लेता है, लेकिन इसमें से पेट्रोल, बाइक सर्विसिंग, मोबाइल डेटा और अन्य खर्च खुद उठाने पड़ते हैं। उनका कहना है कि हर महीने लगभग 5 से 7 हजार रुपये केवल पेट्रोल और वाहन रखरखाव में खर्च हो जाते हैं। ऐसे में वास्तविक बचत काफी कम रह जाती है।
ट्रैफिक और लंबी दूरी से बढ़ी परेशानी
डिलीवरी एजेंटों का कहना है कि पहले कम दूरी में ज्यादा ऑर्डर पूरे हो जाते थे, लेकिन अब ट्रैफिक, लंबी दूरी और महंगे ईंधन के कारण समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। कई पार्टनर्स ने बताया कि यदि किसी दिन ऑर्डर कम मिलते हैं, तो पेट्रोल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। खराब मौसम और ट्रैफिक जाम की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्राहकों पर भी दिख रहा असर
इसका असर अब ग्राहकों पर भी दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में डिलीवरी का समय पहले की तुलना में बढ़ गया है। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां पहले 20 से 30 मिनट में ऑर्डर पहुंच जाता था, अब उसमें काफी अधिक समय लग रहा है। इससे नौकरीपेशा लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, जबकि छात्रों और बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पेट्रोल संकट ने और बढ़ाई मुश्किल
शहर के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन स्टॉक खत्म होने की स्थिति ने भी डिलीवरी पार्टनर्स की परेशानी बढ़ा दी है। कई बार उन्हें पेट्रोल भरवाने के लिए दूसरे इलाकों तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। एक गिग वर्कर ने बताया कि पेट्रोल संकट और महंगाई की वजह से बाजार में करीब 25 प्रतिशत तक गिरावट महसूस की जा रही है। लोग अब गैरजरूरी ऑनलाइन ऑर्डर कम कर रहे हैं, जिससे उनकी कमाई और प्रभावित हो रही है।
भविष्य में सेवाओं पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही और गिग वर्कर्स की आय में संतुलित सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में डोर-टू-डोर सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल गिग वर्कर्स बढ़ते खर्च और घटती बचत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।






