झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, 2400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल; 169 आरोपी नामजद
रांची: झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली मामले में रांची पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में 2400 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में 169 आरोपियों को नामजद किया गया है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान जुटाए गए तकनीकी, डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। मामले की सुनवाई अब न्यायालय में आगे बढ़ेगी, जहां आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
169 आरोपियों की भूमिका का विस्तृत विवरण
रांची पुलिस के अनुसार, चार्जशीट में यह विस्तार से बताया गया है कि किस आरोपी ने परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर कथित रूप से हस्तक्षेप किया और पेपर लीक व धांधली की साजिश में उसकी क्या भूमिका रही। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य वैज्ञानिक प्रमाण जुटाए हैं, जिन्हें आरोप पत्र का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, ताकि अदालत में मजबूत पैरवी की जा सके।
कई चरणों में हुई जांच
पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद रांची पुलिस लगातार पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी रही। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के बीच आपसी संपर्क, डिजिटल लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों की पड़ताल की। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई 2400 पन्नों की चार्जशीट अब अदालत में दाखिल की गई है। पुलिस का दावा है कि पूरी जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से की गई है।
अप्रैल में सामने आया था मामला
गौरतलब है कि इसी वर्ष अप्रैल 2026 में झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले रांची पुलिस को सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह पेपर लीक कर परीक्षा में धांधली की साजिश रच रहा है।
सूचना के आधार पर पुलिस ने तमाड़ क्षेत्र में छापेमारी की थी, जहां से पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद तमाड़ थाना कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
अब कोर्ट में चलेगी सुनवाई
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।




