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झारखंड में महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा: सेतु दीदी और सखी मंडलों ने दिखाई स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता की राह

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14 राज्यों के अधिकारियों की मौजूदगी में महिलाओं ने साझा किया स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य का ग्रासरूट मॉडल

रांची, 24 जुलाई 2025: झारखंड की राजधानी रांची में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की गई। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के 14 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।कार्यशाला का मुख्य फोकस रहा—“स्वस्थ भविष्य की ओर संगठित ग्रामीण महिलाएं।” इस कार्यक्रम में झारखंड की ग्रामीण महिलाओं के संगठनों द्वारा स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया।

महिला सशक्तिकरण से जुड़े ठोस कदम
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने भाषण में कहा—

“महिलाओं का स्वास्थ्य केवल सामाजिक संकेतक नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का आईना है। सखी मंडलों के माध्यम से झारखंड की महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति की भागीदार भी बन चुकी हैं।”

उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन योजना, दीदी बाड़ी और पोषण वाटिका जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये महिलाएं आज राज्य के हर कोने में बदलाव की वाहक बन चुकी हैं।

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सेतु दीदियों को मिला सम्मान
कार्यशाला में झारखंड की उन सेतु दीदियों को मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। खूंटी की क्लेमेंसिया ओर्रा जैसी कार्यकर्ता ने टीपीसी ग्रुप के माध्यम से महिलाओं को आयरन, कैल्शियम और डीवॉर्मिंग गोलियों के लाभ समझाने का कार्य किया है।

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राज्यों की सहभागिता और ज्ञान-साझाकरण
राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, ओडिशा समेत अन्य राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने राज्य के अनुभव साझा किए। स्टेट वाईज मॉडल, जैसे कि “स्वास्थ्य संवाद सत्र”, “मासिक सखी बैठकें” और “आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय” जैसे नवाचारों पर चर्चा हुई।

झारखंड की उपलब्धियां बनीं मॉडल
संयुक्त सचिव स्मृति शरण ने कहा—

“झारखंड ने एफएनएच—फूड, न्यूट्रिशन, हेल्थ और हाइजीन—के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है। राज्य का मॉडल दूसरे राज्यों के लिए दिशा-निर्देश बन सकता है।”

उन्होंने आगामी “रूरल प्रॉस्पेरिटी एंड रेजिलिएंस प्रोग्राम” की भी जानकारी दी, जिसमें FNH को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

फूलो-झानो योजना से बदला परिदृश्य
कार्यशाला में ग्रामीण विकास सचिव के. श्रीनिवासन ने बताया कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के तहत अब तक 36 हजार महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण मिल चुका है। जल्द ही जोहार योजना का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा—

“यह कार्यशाला सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि एक ठोस एक्शन प्लान तैयार करने का माध्यम है।”

स्टॉल और नवाचारों की प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र
कार्यशाला स्थल पर लगाए गए 14 राज्यों और झारखंड के स्टॉल्स में पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और ऊर्जा से जुड़ी महिला-प्रधान पहलों की झलक देखने को मिली। ग्रामीण विकास मंत्री ने स्वयं प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन किया और इन पहलों को अन्य जिलों में दोहराने पर बल दिया।

झारखंड में आयोजित यह कार्यशाला महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में महिलाओं की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का एक प्रयास है। झारखंड की महिलाएं अब न केवल घर की दीवारों तक सीमित हैं, बल्कि वे गांवों के विकास की दिशा तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण जैसे विषयों में जागरूकता लाना और सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करना इस नई झारखंड की सबसे बड़ी उपलब्धि बन रही है।

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