हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान दो माह में चार की मौत, एक्सपर्ट टीम बुलानी पड़ी

गढ़वा हाथी आतंक

गढ़वा जिले में इन दिनों हाथियों का आतंक सातवें आसमान पर है। वहीं, वन विभाग के प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसा मैं नहीं ये वन विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों किये गए प्रयासों से पता चल रहा है। चूंकि विभाग अपने स्तर से सभी तरह से प्रयास करके थक गया। अंत में पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से एक्सपर्ट टीम बुलानी पड़ी। दरअसल, गढ़वा जिला का रंका अनुमंडल का क्षेत्र जहां हाथी कभी लोगों की जान पर आफत बना हुआ है।

हाथी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गरीब लोगों का कच्चा घर को ध्वस्त कर दे रहे हैं। अनाज भी खा जा रहे हैं।अभी हाल ही में 40 से 45 हाथियों का एक झुंड इस क्षेत्र में मौजूद है। वन विभाग के अधिकारी खुद ही इस बात की पुष्टि कह रहे हैं। वहीं, अभी एक से दो माह के बीच में चार लोगों को हाथियों ने कुचलकर मार डाला। लेकिन वन विभाग अब तक क्या कर रहा था और क्या वजह थी की पिछले दो वर्षों में भी हाथियों को नहीं भगा सका। यह बात झारखण्ड सरकार या वन विभाग के उच्च अधिकारी ही विशेष रूप से बता सकते हैं। चार लोगों की मौत के बाद हाथियों को भगाने के लिए बाकूड़ा की टीम बुलाकर प्रयास करने की बात रेंजर द्वारा कही जा रही। लेकिन अगर इस बार भी हाथी नहीं भागे तो और कितने लोगों की जान लेंगे

हाथी हमले

वहीं, हाथियों के झुंड के बारे में रंका अनुमंडल क्षेत्र के रेंजर राम रतन पाण्डेय ने बताया की इस क्षेत्र में हाथियों की संख्या 43 से 45 की है और लगातार घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। कई बार हाथियों को यहां से भगाया भी गया है लेकिन हाथी जाकर भी लौट जा रहे है।जिससे लोगों को काफी परेशानी और नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। हाथियों का भी अपना कोरिडोर रोडमैप होता है, जिस रास्ते से जाते है पुनः उसी रास्ते से रिटर्न भी होते हैं। लेकिन इनके रास्ते में लोग घर मकान बनाकर इनके रास्ते को भटका दिया है जिससे हाथियों का झुंड बिखर जाता है और नुकसान पहुंचाता है ।

वहीं, रेंजर राम रतन पांडेय ने कहां की सभी को आवेदन के लिए बोला गया है और जो भी नुकसान हुआ है उसके अनुसार सभी को मुआवजा दिया जाएगा….

हाथी बचाव उपाय
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वहीं, गढ़वा दक्षिणी के वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेन अब्राहम ने कहा कि पिछले दो माह में तीन की मौत और एक की मौत कुछ दिन पूर्व हुआ है। वहीं, डीएफओ ने कहा कि लोगों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से सूचना दी जा रही है की हाथी से कैसे बचाव करें। वहीं, पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा की टीम जो हाथी के इस झुंड को यहां से कैसे उनको भगाना है उसके लिए काम कर रहा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में हुए मौत और फसलों, घरों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए वन समिति और वन विभाग के लोगों के माध्यम से फार्म भरें तथा उनके हर नुकसान की भरपाई वन विभाग के द्वारा की जायेगी। इसके लिए वन समिति और वन विभाग के कर्मचारी से संपर्क करने की बात कही।

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वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सतर्कता बरतने की बात कही जिस क्षेत्र में हाथी की सूचना है।वहां नहीं जाने की अपील की है। साथ ही हाथी के होने की सूचना वन विभाग के अधिकारी वन समिति को दें।

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