राष्ट्रपति ने शिबू सोरेन समेत 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया

Padma Awards

धर्मेंद्र, ममूटी, रोहित शर्मा और हरमनप्रीत कौर सहित कई दिग्गजों को मिला देश का प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश की 131 विशिष्ट हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस दौरान राजनीति, खेल, सिनेमा, साहित्य, चिकित्सा, विज्ञान और सामाजिक सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित समारोह में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। यह झारखंड के लिए गौरव का क्षण रहा।

शिबू सोरेन को मरणोपरांत सम्मान
झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को उनके लंबे राजनीतिक जीवन और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म सम्मान दिया गया। शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उनके सम्मान को झारखंड आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की बड़ी पहचान माना जा रहा है।

धर्मेंद्र और ममूटी को भी मिला सम्मान
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र और दक्षिण भारतीय फिल्म जगत के सुपरस्टार ममूटी को भी पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सिनेमा जगत में दशकों से उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया।

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खेल जगत की हस्तियां भी सम्मानित
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा और महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर को खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई यादगार जीत दिलाई हैं।

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131 हस्तियों को मिला सम्मान
इस वर्ष कुल 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया। इनमें कला, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ये सम्मान देश के उन लोगों को समर्पित हैं जिन्होंने अपने समर्पण और प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी है।

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झारखंड में खुशी की लहर
शिबू सोरेन को मिले सम्मान के बाद झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है। झामुमो नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसे पूरे राज्य के लिए सम्मान बताया है। राजनीतिक हलकों में इसे झारखंड आंदोलन की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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