ईडी की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी समूह से जुड़ी ₹1,885 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों की करीब 1,885 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई विभिन्न बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार यह कुर्की रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL), यस बैंक से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से संबंधित बैंक फ्रॉड मामलों की जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने कहा है कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
किन संपत्तियों पर हुई कार्रवाई
ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कुछ प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी शामिल है। इनमें बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में शेयर होल्डिंग शामिल बताई गई है।
इसके अलावा वैल्यू कॉर्प फाइनेंस एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड के नाम पर मौजूद लगभग 148 करोड़ रुपये की बैंक राशि और करीब 143 करोड़ रुपये की देनदारियां (रिसीवेबल्स) भी कुर्क की गई हैं।
समूह के अधिकारियों से जुड़ी संपत्तियां भी अटैच
ईडी ने जांच के दौरान रिलायंस समूह के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ी संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया है। इनमें अंगराई सेतुरामन के नाम पर एक आवासीय मकान और पुनीत गर्ग के नाम पर शेयर व म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध भी जांचाधीन वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हुआ है।
कुल कुर्की का आंकड़ा पहुंचा करीब ₹12,000 करोड़
ईडी के अनुसार, इससे पहले भी आरकॉम, आरसीएफएल और आरएचएफएल से जुड़े मामलों में 10,117 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। ताजा कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी समूह से संबंधित कुल कुर्क संपत्तियों का आंकड़ा अब करीब 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यस बैंक निवेश और एनपीए का मामला
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में ₹2,965 करोड़ और RCFL में ₹2,045 करोड़ का निवेश किया था। दिसंबर 2019 तक ये निवेश गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) में बदल गए। उस समय RHFL पर करीब ₹1,353.50 करोड़ और RCFL पर ₹1,984 करोड़ बकाया बताए गए।
सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप
ईडी की जांच में यह भी आरोप है कि RHFL और RCFL को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन प्राप्त हुआ। सेबी के नियमों के कारण रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड सीधे निवेश नहीं कर सकता था, इसलिए कथित तौर पर धन को यस बैंक के माध्यम से घुमाकर इन कंपनियों तक पहुंचाया गया।
कर्ज राशि के उपयोग पर सवाल
एजेंसी के मुताबिक, लिए गए कर्ज का इस्तेमाल कथित रूप से पुराने कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को धन देने और म्यूचुअल फंड व फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ राशि विदेशों में भेजे जाने की बात भी सामने आई है।
यह पूरी जांच सीबीआई की दर्ज एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ रही है। ईडी का कहना है कि मामले में जांच जारी है और आगे भी और खुलासे हो सकते हैं।






