आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं
टेंडर घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई, ED को 4 हफ्ते में गवाह पेश करने का निर्देश
रांची: टेंडर घोटाले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। भारत के सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बचाव पक्ष की दलीलों को आंशिक रूप से सुना। कोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि वह प्रमुख गवाहों के बयान जल्द दर्ज कराए और इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। यह मामला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की पीठ में सुना गया।
अगली सुनवाई में तय होगा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि अगली सुनवाई में गवाहों के बयान और जांच की प्रगति के आधार पर जमानत पर विचार किया जाएगा। यानि फिलहाल राहत नहीं मिली है, लेकिन मामला खुला हुआ है।
हाईकोर्ट से भी मिल चुकी है निराशा
इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय ने भी 11 जुलाई को आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
क्या है पूरा मामला?
ED के अनुसार, यह मामला टेंडर घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं। ED का दावा है कि उनके करीबी सहयोगियों संजीव कुमार लाल (आप्त सचिव), जहांगीर आलम (नौकर) के ठिकानों से करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसी बरामदगी के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया।
फिलहाल क्या स्थिति?
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब आलमगीर आलम को जमानत के लिए इंतजार करना होगा। वहीं, ED और जांच एजेंसियां इस केस को और मजबूत करने में जुटी हैं। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं।





