ऑनलाइन–ऑफलाइन मोड में शिक्षकों के लिए पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा शुरू, 12 फरवरी तक आवेदन
रांची: शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों और एजुकेशन प्रोफेशनल्स के लिए अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल करते हुए अपने बेंगलूरु कैंपस में संचालित एक वर्षीय पार्ट-टाइम पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा (PG Diploma) कार्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन कार्यक्रमों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 12 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। वहीं फरवरी में साक्षात्कार आयोजित होंगे और कक्षाएं 1 मार्च 2026 से प्रारंभ होंगी।
यह डिप्लोमा कार्यक्रम विशेष रूप से उन शिक्षकों व प्रशिक्षणकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो वर्तमान में स्कूलों, सरकारी/निजी संस्थानों, गैर-लाभकारी संगठनों, एनजीओ या शैक्षिक परियोजनाओं में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और अपने काम के साथ-साथ उच्च स्तर की प्रोफेशनल सीख जारी रखना चाहते हैं।
कौन-कौन से PG डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू किए गए हैं?
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने शिक्षकों की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन प्रमुख क्षेत्रों में डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू किए हैं—
- आरंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Childhood Education)
- शैक्षणिक मूल्यांकन (Educational Assessment)
- लर्निंग डिसएबिलिटी वाले बच्चों को पढ़ाने से संबंधित प्रशिक्षण (Learning Disabilities)
विश्वविद्यालय का मानना है कि इन विषयों की उपयोगिता केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका सीधा संबंध कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक शिक्षण अनुभवों और बच्चों की जरूरतों से है।
ऑनलाइन क्लास + ऑफलाइन कैंपस सेशन का ‘हाइब्रिड मॉडल’
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसे ऑनलाइन–ऑफलाइन हाइब्रिड मोड में संचालित किया जाएगा। प्रतिभागियों को ऑनलाइन कक्षाएं मिलेंगी, साथ ही बेंगलूरु कैंपस में ऑफलाइन सत्र भी होंगे। इससे वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए बिना नौकरी छोड़े पढ़ाई जारी रखना आसान होगा।
यानी शिक्षक अपने विद्यालय/संस्थान में कार्य करते हुए, नियमित रूप से इस पाठ्यक्रम में भाग लेकर अपनी क्षमता, समझ और शिक्षण तकनीक को बेहतर बना सकेंगे।
डिप्लोमा में 4 सर्टिफिकेट प्रोग्राम, विकल्प भी उपलब्ध
हर PG डिप्लोमा कार्यक्रम में 12 सप्ताह के कुल चार सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल किए गए हैं। विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाते हुए यह विकल्प भी दिया है कि इच्छुक अभ्यर्थी—
- पूरा डिप्लोमा कर सकते हैं, या
- केवल एक सर्टिफिकेट प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैं
इस व्यवस्था से उन शिक्षकों को भी लाभ मिलेगा, जो किसी एक विशेष क्षेत्र (जैसे लर्निंग डिसएबिलिटी/असेसमेंट) में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाना चाहते हैं।
प्रवेश के लिए 2 वर्षों का अनुभव अनिवार्य
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन डिप्लोमा कार्यक्रमों में आवेदन के लिए कम-से-कम 2 वर्षों का कार्य अनुभव अनिवार्य रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोर्स में वही लोग शामिल हों जो वास्तविक रूप से शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं और प्रशिक्षण के अनुभव को अपने कार्यक्षेत्र में लागू कर सकें।
शिक्षा संकाय निदेशक का बयान
विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के निदेशक अंकुर मदान के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसा ज्ञान व कौशल देना है जो—
- कक्षा में रोज़मर्रा के शिक्षण कार्य में तुरंत उपयोगी हो
- बच्चों के साथ व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सके
- शिक्षकों के बीच प्रोफेशनल सहयोग और टीम वर्क को मजबूत करे
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल “डिग्री” नहीं, बल्कि वास्तविक शिक्षा-प्रक्रिया को समझने और बेहतर बनाने का साधन है।
झारखंड और पूर्वी भारत के शिक्षकों के लिए अवसर
हाल के वर्षों में झारखंड सहित पूर्वी भारत में शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचार आधारित शिक्षण की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। ऐसे में यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए अवसर बन सकता है जो क्वालिटी टीचिंग, बच्चों के सीखने के स्तर की समझ और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ बेहतर कार्य करना चाहते हैं।






