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झारखंड की विकास यात्रा को चाहिए केंद्र की मजबूती: हेमंत सोरेन ने पूर्वी परिषद में रखीं 31 अहम मांगें
Zonal Council Meetingकोल रॉयल्टी से लेकर ट्राइबल यूनिवर्सिटी और महिला सशक्तिकरण योजना तक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में हुई 27वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद बैठक में झारखंड के हितों की वकालत की।
रांची से अमित की रिपोर्ट : झारखंड के समग्र विकास की दिशा में एक नई पहल करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की 31 प्रमुख मांगें रखीं। यह बैठक राजधानी रांची में आयोजित की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ तौर पर कहा कि झारखंड जैसे खनिज-सम्पन्न राज्य को उसकी हक की रॉयल्टी नहीं मिल रही है, जिससे राज्य के विकास पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सहकारी संघवाद को सही मायने में धरातल पर लाना है तो केंद्र सरकार को राज्यों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

कोल कंपनियों से रॉयल्टी की वसूली – झारखंड का हक़
मुख्यमंत्री ने कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों से 1.40 लाख करोड़ रुपये की लंबित रॉयल्टी की तत्काल वसूली की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पैसा झारखंड के संसाधनों का है और इसे राज्य के सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
‘मंईयां सम्मान योजना’ – महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री सोरेन ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘मंईयां सम्मान योजना’ शुरू करने की सिफारिश की, जिसके तहत 18 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रतिमाह ₹2,500 की वित्तीय सहायता देने की बात कही गई। उन्होंने इसे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
रांची मेट्रो – राजधानी को नई रफ्तार देने की तैयारी
राज्य सरकार ने केंद्र से रांची मेट्रो परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देने और उसे वित्तीय सहायता देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी रांची में यातायात का दबाव तेजी से बढ़ रहा है, और मेट्रो से इसकी बड़ी राहत मिल सकती है।
ट्राइबल यूनिवर्सिटी – झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मिले सम्मान
हेमंत सोरेन ने झारखंड में एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि यह संस्थान आदिवासी समाज की शिक्षा, संस्कृति और शोध को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि इससे झारखंड की आदिवासी पहचान को संरक्षित और समृद्ध किया जा सकेगा।

अन्य मांगें जो राज्य के भविष्य को दिशा देंगी
मुख्यमंत्री द्वारा रखी गई अन्य मांगों में निम्नलिखित प्रमुख रहीं:
- ग्रामीण विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की विशेष सहायता।
- एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र को बढ़ावा देकर युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना।
- डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) नीति में सुधार कर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सहायता।
- बांध और जल संसाधन प्रबंधन परियोजनाओं के लिए त्वरित स्वीकृति।
- जंगल अधिकार अधिनियम और पंचायत विस्तार अधिनियम (PESA) के कार्यान्वयन में केंद्र का सहयोग।
सहकारी संघवाद की अपील
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में यह स्पष्ट किया कि सहकारी संघवाद केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे नीतियों और निर्णयों में व्यवहारिक रूप से उतारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड को उसकी ज़रूरतों और विशेषताओं के आधार पर योजनाएं और सहायता मिलनी चाहिए।

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक झारखंड के लिए केवल एक मंच नहीं, बल्कि एक अवसर था – अपनी जरूरतों, प्राथमिकताओं और अधिकारों को दिल्ली तक पहुंचाने का। हेमंत सोरेन की 31 मांगों की सूची इस बात की गवाही देती है कि झारखंड अब अपने हक़ और विकास के लिए मुखर हो चुका है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इन मांगों पर कितना और कितनी जल्दी अमल करती है।
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