हर 6 घंटे में WhatsApp से लॉगआउट? जानिए SIM-बाइंडिंग नियम की सच्चाई

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नई दिल्ली: मैसेजिंग ऐप्स को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जानकारी दी है कि नवंबर 2025 से SIM-बाइंडिंग से जुड़े निर्देश लागू किए जाएंगे।

इन निर्देशों के तहत मैसेजिंग ऐप्स—जिनमें सबसे बड़ा नाम WhatsApp का है—को कुछ तकनीकी बदलाव करने होंगे।

क्या है SIM-बाइंडिंग नियम?
SIM-बाइंडिंग का मतलब है कि किसी मैसेजिंग ऐप का उपयोग उसी मोबाइल डिवाइस पर किया जा सकेगा, जिसमें संबंधित नंबर की सक्रिय और रजिस्टर्ड SIM मौजूद हो।

प्रस्ताव के मुताबिक WhatsApp Web जैसी सेवाओं पर हर 6 घंटे में यूज़र को जबरन लॉगआउट करना पड़ सकता है।यदि डिवाइस में रजिस्टर्ड SIM मौजूद नहीं है, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। मैसेजिंग कंपनियों को 28 फरवरी तक अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

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क्यों लाया जा रहा है यह नियम?
सरकार का उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड, फर्जी खातों और साइबर अपराधों पर रोक लगाना है। कई मामलों में देखा गया है कि बिना वैध SIM या क्लोन नंबर के जरिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जाता है। SIM-बाइंडिंग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यूज़र की पहचान वास्तविक और सत्यापित हो।

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यूज़र्स पर क्या पड़ेगा असर?
अगर यह नियम लागू होता है तो लंबे समय तक WhatsApp Web खुले रखने वाले यूज़र्स को हर 6 घंटे में दोबारा लॉगिन करना होगा। सेकेंडरी डिवाइस या बिना SIM वाले टैबलेट/फोन पर ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है। मल्टी-डिवाइस फीचर में बदलाव संभव है।

हालांकि, अभी अंतिम तकनीकी दिशा-निर्देश और कंपनियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया आना बाकी है।

क्या नवंबर 2025 से पूरी तरह लागू होगा नियम?
मंत्री के अनुसार, नवंबर 2025 से ये निर्देश प्रभावी रहेंगे। फिलहाल कंपनियों को 28 फरवरी तक अनुपालन सुनिश्चित करने की समय-सीमा दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा, लेकिन उपयोगकर्ता अनुभव पर इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल यूज़र्स को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन आने वाले महीनों में WhatsApp और अन्य मैसेजिंग ऐप्स में कुछ बदलाव जरूर देखने को मिल सकते हैं।

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