राज्यपाल से मिलीं अंबा प्रसाद, विस्थापन और शोषण का उठाया मुद्दा

Amba Prasad

रांची : शनिवार को झारखंड की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य में बिगड़ती प्रशासनिक व्यवस्था और विस्थापन की गंभीर समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने राज्य में चल रही बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर रैयतों के कथित शोषण पर गहरी चिंता जताई।

अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि झारखंड में भारत रत्न और महारत्न कंपनियों के नाम पर NTPC और CCL जैसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां स्थानीय रैयतों का खुलेआम शोषण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में प्रशासन की मिलीभगत से लोगों से जबरन काम कराया जा रहा है।

पूर्व विधायक के अनुसार, परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों को न तो उचित मुआवजा दिया जा रहा है और न ही पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। रोजगार और नौकरी देने के वादे सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं, जबकि ज़मीन देने वाले लोगों को उनका बुनियादी हक तक नहीं मिल पा रहा है।

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की मांग करते हैं, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है। अंबा प्रसाद ने कहा कि जब युवा जॉइनिंग लेटर या रोजगार की मांग करते हैं, तो उन्हें अपराधी की तरह पेश किया जाता है। उनके अनुसार, रोज़ाना 15 से 30 लोग जेल भेजे जा रहे हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

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अंबा प्रसाद ने दावा किया कि दर्ज की जा रही एफआईआर को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि पूरी कार्रवाई एक तय स्क्रिप्ट के तहत की जा रही है, ताकि विस्थापितों और आंदोलनकारियों की आवाज़ को दबाया जा सके। उन्होंने कहा, “हम इस अन्याय को न तो सहन करेंगे और न ही चुप बैठेंगे। यह लड़ाई हम सड़क पर भी लड़ रहे हैं और न्यायालय में भी।”

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पूर्व विधायक ने बताया कि इन्हीं तमाम तथ्यों और ज़मीनी सच्चाइयों से महामहिम राज्यपाल को अवगत कराने के लिए वे उनसे मिलने पहुंचीं, ताकि झारखंड में हो रहे शोषण और विस्थापन की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और प्रभावित लोगों को न्याय मिल सके।

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