झारखंड DGP नियुक्ति पर केंद्र की आपत्ति, नियमों के उल्लंघन का आरोप

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झारखंड DGP नियुक्ति पर केंद्र की आपत्ति, तदाशा मिश्रा की नियुक्ति नियमों के खिलाफ

Ranchi : झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 30 दिसंबर को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले सीनियर आईपीएस तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर बीते तीन बार की गई डीजीपी नियुक्तियों को नियमों के विरुद्ध बताया है और स्पष्ट कहा है कि तदाशा मिश्रा को 31 दिसंबर 2025 से सेवानिवृत्त माना जाए।

13 जनवरी को हुआ पत्राचार, नियुक्ति असंवैधानिक करार
हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले में 13 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय और झारखंड सरकार के बीच पत्राचार हुआ। पत्र में तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाए जाने की प्रक्रिया को संविधान और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया गया है।

यह पहला मौका नहीं है जब केंद्र ने झारखंड सरकार की डीजीपी नियुक्ति पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी गृह मंत्रालय ने अनुराग गुप्ता को डीजीपी बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

बाबूलाल मरांडी ने केंद्र को दी थी जानकारी
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 7 जनवरी को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी। अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने उल्लेख किया था कि 6 नवंबर 2025 को अनुराग गुप्ता के डीजीपी पद से इस्तीफे के बाद तदाशा मिश्रा को प्रभारी डीजीपी और पुलिस बलों का प्रमुख बना दिया गया, जबकि उस समय उनकी सेवा अवधि मात्र दो महीने शेष थी।

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सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले स्थायी नियुक्ति
पत्र में यह भी कहा गया है कि बाद में सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले, नियमों को दरकिनार करते हुए तदाशा मिश्रा को स्थायी डीजीपी नियुक्त कर दिया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह प्रक्रिया न केवल पुलिस सुधारों से जुड़े दिशा-निर्देशों के खिलाफ है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।

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अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर भी सवाल
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनुराग गुप्ता की डीजीपी नियुक्ति भी तय मानकों के अनुरूप नहीं थी। इस तरह, झारखंड में लगातार तीसरी बार डीजीपी की नियुक्ति को लेकर कानूनी और संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।

सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल
केंद्र की आपत्ति के बाद झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या डीजीपी नियुक्ति को लेकर नया निर्णय लिया जाता है।

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