ईरान युद्ध का असर: हीलियम संकट से MRI सेवाएं प्रभावित होने का खतरा

Helium Crisis

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव भारत की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हीलियम गैस की संभावित कमी से देश में MRI (एमआरआई) सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है।

हीलियम एक बेहद महत्वपूर्ण गैस है, जिसका उपयोग एमआरआई मशीनों में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। इसके बिना एमआरआई मशीनों का संचालन संभव नहीं है। भारत पूरी तरह से हीलियम के आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से कतर से आता है।

कतर पर निर्भरता बनी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कतर से हीलियम की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कतर वैश्विक हीलियम आपूर्ति का करीब 30-33 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। ऐसे में वहां उत्पादन या आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ना तय है।

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फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति के अध्यक्ष और महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के संस्थापक डॉ. हर्ष महाजन ने चेतावनी दी है कि इस संकट से स्वास्थ्य क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि एक नए MRI स्कैनर को शुरू करने के लिए करीब 1500 लीटर लिक्विड हीलियम की जरूरत होती है, और इसकी कमी से नई मशीनों की स्थापना में देरी हो सकती है।

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मरीजों पर पड़ सकता है असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हीलियम की कमी से MRI स्कैन की लागत बढ़ सकती है और जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर छोटे और निजी क्लीनिकों में सेवाएं प्रभावित होने की संभावना ज्यादा है।

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एशियन सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तमोरिश कोले के मुताबिक, भारत में हीलियम की कोई घरेलू आपूर्ति नहीं है, जिससे यह स्थिति और संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि आपूर्ति में लंबी बाधा आती है, तो इससे डायग्नोस्टिक सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा।

गंभीर बीमारियों पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि MRI जांच में देरी का असर गंभीर बीमारियों जैसे स्ट्रोक, ट्रॉमा और कैंसर के इलाज पर पड़ सकता है। समय पर जांच न होने से मरीजों के उपचार में देरी हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

क्या हैं विकल्प?
हालांकि, कुछ कंपनियां ‘हीलियम-फ्री’ या ‘हीलियम-लाइट’ MRI सिस्टम विकसित कर रही हैं, लेकिन ये अभी शुरुआती चरण में हैं और पारंपरिक हाई-एंड MRI मशीनों का पूरी तरह विकल्प नहीं बन पाए हैं।

आगे क्या?
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि मध्य पूर्व में स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह संकट एक बार फिर यह दिखाता है कि वैश्विक घटनाओं का असर केवल अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि आम लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है।

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