डिप्टी CM की डिमांड से बढ़ा सियासी पेंच: चिराग पासवान ने बदली बिहार की राजनीतिक हवा

Bihar Cabinet

नई सरकार बनने से पहले NDA में बढ़ी टेंशन, बीजेपी–जेडीयू के फैसले पर सबकी नज़र

बिहार: बिहार में नई सरकार के गठन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 20 नवंबर को नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ लेगी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे। लेकिन शपथ से पहले ही एनडीए के भीतर एक बड़ा सियासी पेंच फंस गया है—और यह पेंच लगाया है एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने।

सूत्रों की मानें तो चिराग पासवान ने खुलकर डिप्टी सीएम पद की मांग कर दी है। यह मांग ऐसे समय आई है जब एनडीए में मंत्रिमंडल का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा था।

कैबिनेट फॉर्मूला क्या है—और इसमें फंसा पेंच?
माना जा रहा है कि नयी सरकार में करीब 35–36 मंत्री होंगे। फॉर्मूला इस प्रकार तय बताया जा रहा था—

  • बीजेपी : 16 मंत्री (2 डिप्टी सीएम समेत)
  • जेडीयू: 14 मंत्री (नीतीश स्वयं समेत)
  • एलजेपीआर: 3 मंत्री
  • HAM: 1 मंत्री
  • RLM: 1 मंत्री

लेकिन अब चिराग पासवान का कहना है कि उनकी पार्टी ने 19 सीट जीतकर एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ बनकर उभरी है। ऐसे में एलजेपी (रामविलास) को उपमुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए। इसी मांग ने एनडीए में नई चर्चाओं और दबाव की स्थिति पैदा कर दी है।

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बीजेपी और जेडीयू क्या चाहती हैं?
बीजेपी की रणनीति साफ है—

  • एनडीए की एकता दिखे
  • नीतीश को बिना किसी विवाद के फिर से मुख्यमंत्री बनाया जाए
  • 2029 की राजनीति को ध्यान में रखते हुए स्थिर और नियंत्रित सरकार चले
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जेडीयू अपनी पारंपरिक दो-डिप्टी सीएम व्यवस्था को पसंद नहीं करती और जेडीयू कभी नहीं चाहेगी कि उसके नीचे एलजेपीआर का डिप्टी सीएम बैठे। ऐसे में चिराग की मांग जेडीयू के लिए असहज और बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण है।

एलजेपीआर का तर्क—19 सीटें, BJP-JDU के बाद तीसरी सबसे मजबूत पार्टी
चिराग पासवान का तर्क है—

  • एलजेपीआर ने 89 में से 19 सीटें जीतकर बड़ा जनादेश हासिल किया
  • पार्टी राज्य की तीसरी सबसे बड़ी ताकत है
  • ऐसे में केवल तीन मंत्री पद “अनुचित” हैं
  • डिप्टी सीएम पद एलजेपीआर का “हक” है

उनकी टीम का कहना है कि युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहिए और एलजेपीआर अब बिहार की निर्णायक शक्ति बन चुकी है।

क्या मांग स्वीकार करेगी बीजेपी?

बीजेपी दो मुश्किलों में है—
चिराग की अनदेखी करने पर गठबंधन में दरार पड़ सकती है
मांग मानने पर जेडीयू नाराज हो सकती है

बीजेपी अभी संतुलन साधने में जुटी है। दिल्ली में चर्चा यह है कि—

  • चिराग को “बड़ा विभाग + 3 मंत्री पद” देकर शांत करने की कोशिश होगी
  • लेकिन डिप्टी सीएम फॉर्मूले में बदलाव की संभावना कम है

फिर भी राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं।

नीतीश कुमार क्या चाहते हैं?
नीतीश कुमार शपथ ग्रहण तक कोई विवाद नहीं चाहते। उनकी प्राथमिकताएँ—

  • सरकार स्थिर चले
  • गठबंधन में तनाव कम हो
  • मंत्रिमंडल जल्द से जल्द फाइनल हो
  • जेडीयू की ताकत सुरक्षित रहे

ऐसे में चिराग की मांग उन्हें बिल्कुल रास नहीं आएगी।

क्या बिहार में फिर बड़ा राजनीतिक मोड़ आएगा?
चिराग पासवान का यह कदम बिहार की नई राजनीति का संकेत है—

  • युवा नेतृत्व की एंट्री
  • सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी की मांग
  • एनडीए के भीतर भविष्य की शक्ति संतुलन की लड़ाई

अगले 48 घंटे बिहार के लिए बेहद अहम होंगे।

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