दावोस में झारखण्ड की मजबूत मौजूदगी, हेमन्त सोरेन करेंगे वैश्विक निवेश संवाद

Jharkhand Vision 2050

प्रकृति के साथ संतुलन में विकास का मॉडल रखेगा राज्य

मुनादी Live डेस्क : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल World Economic Forum की वार्षिक बैठक के दौरान दावोस में एक स्पष्ट और मजबूत उद्देश्य के साथ शामिल होगा। इस वैश्विक मंच पर झारखण्ड खुद को केवल खनिज संसाधनों वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि स्थिरता, ऊर्जा बदलाव, समावेशी विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप औद्योगिक प्रगति को अपनाने वाले राज्य के तौर पर प्रस्तुत करेगा।

दावोस में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठकों, विचार-विमर्श सत्रों और द्विपक्षीय चर्चाओं के माध्यम से झारखण्ड वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं, नीति निर्माताओं, बहुपक्षीय संस्थानों और निवेशकों से सीधा संवाद करेगा।

प्रकृति के साथ संतुलन में विकास है झारखण्ड की मूल दृष्टि
झारखण्ड इस बैठक में “प्रकृति के साथ संतुलन में विकास” की सोच के साथ भाग ले रहा है। यह दृष्टिकोण आर्थिक विकास को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ता है। अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर चुके युवा राज्य के रूप में झारखण्ड यह संदेश देगा कि वह बेहतर शासन, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकास का रास्ता तैयार कर रहा है।

वैश्विक कंपनियों और संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान मुख्यमंत्री टाटा स्टील, हिताची, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, इंफोसिस, वेलस्पन, एबी इनबेव, ब्लूमबर्ग, टेक महिंद्रा, अल्फानार, रामकी ग्रुप और एवरस्टोन ग्रुप सहित स्वीडन, अमेरिका और यूरोप की वैश्विक व्यापार परिषदों और संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे।

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इन बैठकों में हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आधुनिक बुनियादी ढाँचा, डिजिटल तकनीक, जलवायु-अनुकूल औद्योगिक विकास और निवेश के अवसरों पर विस्तार से चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ऊर्जा बदलाव, क्षेत्रीय नेतृत्व, स्थिर आपूर्ति श्रृंखला और भारत की वैश्विक भूमिका से जुड़े उच्च-स्तरीय पैनल संवादों में भी भाग लेंगे।

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20 जनवरी को झारखण्ड पवेलियन का उद्घाटन
दावोस में झारखण्ड प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी का सबसे अहम हिस्सा झारखण्ड पवेलियन का उद्घाटन होगा, जो 20 जनवरी को किया जाएगा। यह पवेलियन राज्य की निवेश संभावनाओं, नीतिगत सुधारों और दीर्घकालिक विकास योजनाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा। इसके जरिए झारखण्ड यह दिखाने का प्रयास करेगा कि वह खनन आधारित पहचान से आगे बढ़कर हरित विकास, मूल्यवर्धित उत्पादन, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और समावेशी रोजगार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

लोगों, प्रकृति और स्थिरता पर आधारित विकास मॉडल
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का मानना है कि झारखण्ड का विकास मॉडल लोगों, प्रकृति और स्थिरता पर आधारित होना चाहिए। राज्य सरकार जिम्मेदार खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, समुदायों की भागीदारी, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम और कौशल विकास को प्राथमिकता दे रही है।

दावोस में झारखण्ड की यह भागीदारी न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि विकास के साथ जिम्मेदारी जरूरी है। विजन 2050 की ओर बढ़ते झारखण्ड के लिए यह वैश्विक मंच एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो राज्य को आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।

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