जंग का 22वां दिन: ट्रंप ‘अभियान समेटने’ के मूड में, IRGC का खाड़ी देशों पर हमले का दावा

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मुनादी लाइव : अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच जारी युद्ध अब 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। पूरे पश्चिम एशिया में भय और अस्थिरता का माहौल है, क्योंकि किसी भी पक्ष की ओर से तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे मध्य-पूर्व में चल रहे सैन्य अभियानों को “समेटने” पर विचार कर रहे हैं, हालांकि इसके समानांतर अमेरिका क्षेत्र में और सैनिक भेज रहा है।

इजराइल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक ‘साउथ पार्स’ पर हमले के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान “तबाही की कगार” पर है और उसने हथियार निर्माण की अपनी प्रमुख क्षमता खो दी है। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए जवाबी हमले और तेज कर दिए हैं।

IRGC का बड़ा दावा: खाड़ी और इजराइल में कई ठिकाने निशाने पर
मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर अल जजीरा, के अनुसार ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इजराइल के कई शहरों के साथ-साथ खाड़ी देशों में भी हमले किए हैं। सरकारी बयान के मुताबिक, तेल अवीव, एकर और हाइफा बे को निशाना बनाया गया।

इसके अलावा, कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भी हमले का दावा किया गया है। प्रेस टीवी के अनुसार, IRGC ने ‘खोर्रमशहर-4’ और ‘क़द्र’ मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों से इजराइल के कई इलाकों पर हमला किया, जिनकी संख्या करीब 25 ठिकानों तक बताई जा रही है।

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लेबनान में बढ़ता संकट, हजारों लोग विस्थापित
इस बीच लेबनान भी इस युद्ध की चपेट में आता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को इजराइली हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई और 57 लोग घायल हुए। ‘नेशनल न्यूज एजेंसी’ के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 1021 तक पहुंच चुकी है, जबकि 2641 लोग घायल हुए हैं।

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सबसे चिंताजनक बात यह है कि 1.34 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इससे क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।

ट्रंप के बयान से नए सवाल
ऐसे समय में जब युद्ध लगातार फैलता जा रहा है, ट्रंप का “अभियान समेटने” का बयान कई सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर वापसी की बात कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस संघर्ष को लेकर दोहरी रणनीति अपना रहा है।

तनाव चरम पर, दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उसके इंफ्रास्ट्रक्चर या रणनीतिक ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो वह और भी कड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है।

कुल मिलाकर, जंग का 22वां दिन यह बता रहा है कि यह संघर्ष अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति—all अब इस युद्ध के असर में हैं। दुनिया की निगाहें फिलहाल पश्चिम एशिया पर टिकी हैं, जहां हालात हर दिन और विस्फोटक होते जा रहे हैं।

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