World No Tobacco Day 2026: एक फोन कॉल ने बदली लाखों जिंदगियां, भारत की Tobacco Quitline ने 10 साल में रचा इतिहास
10 साल में लगभग 1 करोड़ कॉल्स, 6.75 लाख पंजीकरण और 2.32 लाख लोगों ने छोड़ी तंबाकू की लत
नई दिल्ली: भारत में तंबाकू सेवन के खिलाफ लड़ाई को एक नई दिशा देने वाली नेशनल टोबैको क्विटलाइन सर्विसेज (NTQLS) ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के अवसर पर जारी आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि एक साधारण फोन कॉल लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकता है।
30 मई 2016 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा शुरू की गई इस सेवा ने पिछले एक दशक में करीब 1 करोड़ कॉल्स रिसीव किए, 6.75 लाख से अधिक तंबाकू उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण किया और 2,32,870 भारतीयों को तंबाकू की लत छोड़ने में सफल मदद पहुंचाई।
यह सेवा भारत की पहली और एकमात्र मुफ्त राष्ट्रीय टेलीफोन आधारित तंबाकू छोड़ो परामर्श सेवा है, जिसका संचालन वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI), दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है।

कैसे शुरू हुई यह क्रांति?
नेशनल टोबैको क्विटलाइन सर्विस की शुरुआत उस सोच से हुई, जिसमें यह समझा गया कि देश के करोड़ों तंबाकू उपयोगकर्ता कभी भी किसी अस्पताल या तंबाकू निषेध केंद्र तक नहीं पहुंच पाएंगे। VPCI के निदेशक और NTQLS के समन्वयक डॉ. राज कुमार ने वर्षों पहले महसूस किया था कि देश के अधिकांश तंबाकू उपभोक्ताओं के पास अस्पताल जाने का समय, संसाधन और जागरूकता नहीं है, लेकिन उनके पास एक फोन जरूर है।
डॉ. राज कुमार कहते हैं,
“भारत में 26.7 करोड़ तंबाकू उपयोगकर्ता हैं। वर्षों तक उनके पास तंबाकू छोड़ने के लिए कोई मुफ्त और संरचित सहायता प्रणाली नहीं थी। क्विटलाइन ने हर भारतीय को यह सम्मान दिया कि उसकी मदद के लिए एक प्रशिक्षित विशेषज्ञ फोन पर उपलब्ध है।”
10 वर्षों का प्रभावशाली सफर
NTQLS के 10 साल के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं:
| उपलब्धि | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल IVR कॉल्स | 99,31,940 |
| कुल पंजीकृत उपयोगकर्ता | 6,75,758 |
| सफलतापूर्वक तंबाकू छोड़ने वाले | 2,32,870 |
| कुल काउंसलिंग सत्र | 37,01,794 |
| सफलता दर | 34.46% |
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यह सेवा केवल हेल्पलाइन नहीं, बल्कि एक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य मिशन बन चुकी है।
युवाओं ने सबसे ज्यादा छोड़ी तंबाकू की आदत
रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक सफलता दर्ज की गई। इस आयु वर्ग के 91,933 युवाओं ने तंबाकू की लत छोड़ी, जो बताता है कि सही समय पर सही परामर्श युवाओं को नशे से दूर करने में बेहद प्रभावी है।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश सबसे अधिक पंजीकरण और सफल क्विटर्स वाला राज्य रहा।
- पंजीकरण: 2,09,964
- सफल क्विटर्स: 69,683
यह सेवा देश के हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश तक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. दिगंबर बेहरा ने इसे भारत की सबसे प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में से एक बताया।
उन्होंने कहा,
“करीब सात लाख पंजीकरण पर 34 प्रतिशत से अधिक की सफलता दर विश्वस्तरीय मानकों के बराबर है। यह दिखाता है कि यदि तंबाकू निषेध सेवाओं को सही संसाधन दिए जाएं तो बड़े पैमाने पर बदलाव संभव है।”
हर साल 13.5 लाख भारतीयों की जान लेता है तंबाकू
भारत में तंबाकू सेवन हर वर्ष 13.5 लाख से अधिक लोगों की मौत का कारण बनता है। देश में कैंसर से होने वाली मौतों में 33 प्रतिशत से अधिक मामलों का संबंध तंबाकू सेवन से है। इसके बावजूद तंबाकू छोड़ने की सुविधाओं में निवेश अब भी सीमित है।

सांसद मनोज तिवारी ने कही बड़ी बात
उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि तंबाकू के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनों से नहीं जीती जा सकती।
उन्होंने कहा,
“तंबाकू की लत केवल व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है। युवाओं को इससे बचाना सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।”
World No Tobacco Day 2026 की थीम
इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने World No Tobacco Day 2026 की थीम रखी है: “Unmasking the appeal – countering nicotine and tobacco addiction” इस अवसर पर डॉ. राज कुमार ने राज्य स्तर पर अलग-अलग क्विटलाइन स्थापित करने, मेडिकल कॉलेजों में अनिवार्य तंबाकू निषेध प्रशिक्षण और आयुष्मान भारत से इसे जोड़ने की मांग की है।

एक नंबर जो बदल सकता है जिंदगी
भारत की नेशनल टोबैको क्विटलाइन का नंबर है: 1800-11-2356, यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है और देशभर में कई भाषाओं में उपलब्ध है।
तंबाकू मुक्त भारत की ओर मजबूत कदम
भारत की नेशनल टोबैको क्विटलाइन ने साबित किया है कि यदि सही परामर्श, आसान पहुंच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए तो करोड़ों लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाला जा सकता है। 10 वर्षों में लगभग 1 करोड़ कॉल्स का सफर सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की नई जिंदगी की कहानी है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 पर यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।






