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खैनी की लत बन रही कैंसर की बड़ी वजह, झारखंड में तेजी से बढ़ रहे मुंह और गले के कैंसर के मामले

Khaini and Cancer

टाटा ट्रस्ट्स की चेतावनी: खैनी की आदत बन रही जानलेवा, झारखंड में बढ़ रहे कैंसर के मामले

रांची: झारखंड में खैनी और अन्य धुआंरहित तंबाकू उत्पादों का बढ़ता सेवन अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से सामान्य आदत समझी जाने वाली खैनी अब बड़ी संख्या में लोगों को मुंह, जीभ और गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है। इस खतरे को देखते हुए टाटा ट्रस्ट्स की पहल Ranchi Cancer Hospital and Research Centre (आरसीएचआरसी) ने लोगों को समय रहते सतर्क रहने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है।

एक छोटी अनदेखी कैसे बन गई कैंसर की वजह
अस्पताल ने जागरूकता के उद्देश्य से बोकारो के एक 45 वर्षीय व्यवसायी का मामला साझा किया है। करीब 18 वर्षों तक नियमित रूप से खैनी का सेवन करने वाले इस व्यक्ति की जीभ पर एक छोटा सफेद धब्बा दिखाई दिया था। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया। समय बीतने के साथ स्थिति गंभीर होती गई। उन्हें खाना खाने, बोलने और सामान्य गतिविधियों में परेशानी होने लगी। जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो पता चला कि वह जीभ के कैंसर से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही जांच कराई जाती तो बीमारी का पता पहले चल सकता था।

झारखंड में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के आंकड़े
आरसीएचआरसी द्वारा साझा किए गए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। अस्पताल के अनुसार वर्ष 2023 में जहां कैंसर के 1126 नए मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 2229 पहुंच गई। सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में ऐसे 80 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई। इनमें लगभग 80 प्रतिशत मरीज पुरुष हैं, जो तंबाकू और खैनी के अधिक सेवन की ओर संकेत करता है।

विशेषज्ञों ने बताए कैंसर के शुरुआती संकेत
आरसीएचआरसी के मेडिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गौतम कुमार शरण के अनुसार झारखंड में खैनी और तंबाकू को अक्सर एक सामान्य सामाजिक आदत के रूप में देखा जाता है, जबकि इसके स्वास्थ्य पर बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुंह में लंबे समय तक छाले बने रहना, सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना, निगलने में परेशानी होना, लगातार दर्द या घाव का ठीक नहीं होना कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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समय पर इलाज से बच सकती है जान
अस्पताल के अनुसार संबंधित मरीज का इलाज सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी के माध्यम से किया गया। समय पर उचित उपचार मिलने के कारण वह अब कैंसर मुक्त जीवन जी रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का मतलब जीवन का अंत नहीं है। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए और उचित उपचार समय पर मिल जाए तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है।

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तंबाकू छोड़ना ही सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह और गले के अधिकांश कैंसर सीधे तौर पर तंबाकू सेवन से जुड़े होते हैं। खैनी, गुटखा, जर्दा और अन्य धुआंरहित तंबाकू उत्पाद लगातार मुंह के अंदर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे तंबाकू उत्पादों का सेवन पूरी तरह बंद करें और अपने परिवार तथा समाज को भी इसके खतरों के प्रति जागरूक करें।

समाज और परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए केवल अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान ही पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, स्कूल, सामाजिक संगठन और समुदाय भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि लोग तंबाकू के नुकसान को समझें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लें, तो बड़ी संख्या में कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है। जागरूकता, समय पर जांच और तंबाकू से दूरी ही इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।

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