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नेमरा गांव में “तीन नहान, दस कर्म और श्राद्ध कर्म” को लेकर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ग्रामीणों से की विस्तृत चर्चा

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नेमरा, रामगढ़, 6 अगस्त 2025 : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज अपने पैतृक गांव नेमरा में ग्रामीणों के साथ एक अत्यंत गंभीर और भावनात्मक संवाद में भाग लिया। यह संवाद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के अंतिम संस्कार उपरांत पारंपरिक अनुष्ठानों — “तीन नहान, दस कर्म और श्राद्ध कर्म” की तैयारी और परंपराओं को लेकर था।

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ग्रामीणों ने साझा किए अनुभव, जताई संवेदना
मुख्यमंत्री ने गांव वासियों से आत्मीयता के साथ संवाद किया। ग्रामीणों ने स्थानीय जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक अनुष्ठानों से जुड़ी अपनी भावनाएं और अनुभव साझा किए।उन्होंने गुरुजी के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए कहा कि शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक परिवार के सदस्य, गांव के अभिभावक, और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे।

“तीन नहान और दस कर्म” पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने “तीन नहान” और “दस कर्म” जैसे परंपरागत जनजातीय संस्कारों की महत्ता को स्वीकारते हुए कहा कि गुरुजी की विदाई न केवल एक राजनीतिक विरासत का अंत है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, रीति और सामाजिक मूल्यों के पुनर्पुष्टि का भी अवसर है।

उन्होंने इन सभी अनुष्ठानों को सामूहिकता, गरिमा और स्थानीय परंपरा के अनुरूप सम्पन्न कराने की बात कही।

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दस कर्म दिवस की तैयारियों का लिया जायजा
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दस कर्म दिवस को लेकर की जा रही तैयारियों का व्यवस्थित निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रशासन को हरसंभव व्यवस्था सुचारू बनाए रखने का निर्देश दिया।

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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक संस्कार नहीं बल्कि गुरुजी की स्मृति को सामाजिक चेतना में स्थापित करने का माध्यम है।

परिजनों और ग्रामीणों ने दी गुरुजी को अंतिम श्रद्धांजलि
इस अवसर पर ग्रामीणों ने फिर से दिवंगत गुरुजी को याद किया। गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और युवाओं ने शिबू सोरेन के व्यक्तित्व और उनके जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए, जिनमें उनके संघर्ष, सादगी और सेवा की भावना प्रमुख रही।

सबने ईश्वर से गुरुजी की आत्मा की शांति और शोकसंतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की प्रार्थना की।

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एक युग का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समापन
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विदाई केवल एक नेता की नहीं, आदिवासी चेतना के आध्यात्मिक केंद्र की विदाई है। “तीन नहान, दस कर्म और श्राद्ध” जैसे अनुष्ठान इस विदाई को संस्कारिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करते हैं, जिसमें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की यह सहभागिता परंपरा और नेतृत्व का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।

ओम शांति 🙏🏼

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