अब AI करेगा राशन दुकानों की निगरानी, लाखों शिकायतों का तुरंत समाधान
नई दिल्ली: गरीब परिवारों को राशन दुकानों पर कम अनाज, अतिरिक्त पैसे की मांग और वितरण में देरी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फीडबैक सिस्टम तेजी से असर दिखा रहा है। केंद्र सरकार की इस नई पहल ने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है, खासकर उन लोगों के लिए जो औपचारिक शिकायत तंत्र तक नहीं पहुंच पाते थे।
21 भाषाओं में ऑटोमेटेड कॉल, 30 लाख लोगों से संपर्क
दिसंबर से अब तक इस एआई तकनीक ने देशभर के करीब 30 लाख लाभार्थियों से 21 स्थानीय भाषाओं में ऑटोमेटेड कॉल के जरिए बातचीत की है। सिस्टम ने बातचीत के दौरान मिले जवाबों का विश्लेषण कर राशन वितरण से जुड़ी समस्याओं की पहचान की। इसके बाद 11 हजार से अधिक शिकायतों को चिन्हित कर तय समय सीमा के भीतर उनका समाधान भी किया गया।
किन समस्याओं की हुई पहचान
AI सिस्टम ने जिन प्रमुख शिकायतों को चिन्हित किया, उनमें अनाज की खराब गुणवत्ता, कम आपूर्ति, वजन में गड़बड़ी, मुफ्त राशन के लिए अनावश्यक शुल्क और वितरण में देरी शामिल हैं। लाभार्थियों के फीडबैक को स्वतः औपचारिक शिकायत में बदलकर संबंधित अधिकारियों को भेजा जाता है, जिससे कार्रवाई में तेजी आती है।
बिना ऐप डाउनलोड किए दर्ज होती है शिकायत
इस प्रणाली की खास बात यह है कि लाभार्थियों को किसी ऐप या ऑनलाइन फॉर्म की जरूरत नहीं पड़ती। उन्हें सिर्फ कॉल रिसीव कर अपनी बात बतानी होती है। बातचीत खत्म होने के बाद शिकायत नंबर के साथ SMS भेजा जाता है, जिससे वे अपने केस की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
15–20 दिन में समाधान का लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार, एक शिकायत को सुलझाने का आदर्श समय 15 से 20 दिन तय किया गया है। इस अवधि के बाद सिस्टम दोबारा कॉल करके लाभार्थी से फीडबैक लेता है। यदि समाधान संतोषजनक नहीं होता, तो प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी जाती है।
सप्लाई चेन में भी AI की मदद
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि AI का इस्तेमाल सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं है। मांग, स्टॉक और लॉजिस्टिक्स का विश्लेषण कर यह सिस्टम खाद्यान्न की आवाजाही को बेहतर बना रहा है, जिससे लागत और देरी कम हो रही है और अंतिम लाभार्थी तक सही मात्रा में राशन पहुंचना सुनिश्चित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित यह पहल डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम है, जो पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ गरीब लाभार्थियों को सीधे सिस्टम से जोड़ रही है।






