रामगढ़ साइबर ठगी कांड में बड़ा खुलासा: दूसरे आरोपी निखिल कुमार की गिरफ्तारी, फर्जी सिम और मोबाइल बरामद
रामगढ़: रामगढ़ जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। साइबर ठगी के एक मामले में पहले गिरफ्तार आरोपी के खुलासे के बाद पुलिस ने दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई मोबाइल फोन और फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिससे इस पूरे साइबर नेटवर्क के और बड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई साइबर अपराध थाना द्वारा की गई है और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
पहले आरोपी की पूछताछ में सामने आया दूसरा नाम
इस मामले में इससे पहले रामगढ़ के गुरूनानक मोहल्ला निवासी विकास कुमार उर्फ विकास यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पूछताछ के दौरान विकास ने अपने सहयोगी निखिल कुमार की भूमिका का खुलासा किया था। विकास के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अधीक्षक रामगढ़ को महत्वपूर्ण सूचना मिली, जिसके बाद निखिल कुमार की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया गया।
विशेष छापेमारी दल ने घर से दबोचा आरोपी
पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सह थाना प्रभारी साइबर अपराध थाना के नेतृत्व में गठित विशेष छापेमारी दल ने सूर्यनगर रोड नंबर-4 स्थित निखिल कुमार के आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 27 वर्षीय निखिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनमें चार सक्रिय सिम कार्ड लगे हुए थे।
तकनीकी जांच में फर्जी निकले सभी सिम कार्ड
बरामद सिम कार्डों का सत्यापन तकनीकी शाखा के माध्यम से कराया गया। जांच में चारों सिम कार्ड फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी पाए गए। पुलिस का मानना है कि साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी पहचान और अवैध तरीके से प्राप्त सिम कार्डों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था। फर्जी सिम के इस्तेमाल से अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलती थी।

मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई फ्रॉड में इस्तेमाल हुआ मोबाइल
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बरामद मोबाइल फोन में से एक मोबाइल का उपयोग पीड़िता के बैंक खाते में मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और नेट बैंकिंग सेवाओं को सक्रिय करने में किया गया था। पुलिस को संदेह है कि इसी माध्यम से बैंक खाते तक पहुंच बनाकर साइबर अपराधियों ने अवैध लेन-देन किए। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि पीड़ित के खाते से लाखों रुपये की राशि साइबर ठगी के जरिए ट्रांसफर करवाई गई थी।
साइबर गिरोह के नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल डाटा की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं हो सकता। साइबर अपराधियों का एक संगठित गिरोह इस नेटवर्क के पीछे सक्रिय हो सकता है, जो फर्जी सिम कार्ड और डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बना रहा था।
डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ बढ़ी पुलिस की सख्ती
रामगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। साइबर अपराधियों की पहचान करने और उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी अनजान लिंक, कॉल, ओटीपी या बैंकिंग संबंधी जानकारी को साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाना को देने का आग्रह किया गया है।
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच चेतावनी
डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। रामगढ़ में हुई यह गिरफ्तारी एक बार फिर यह संकेत देती है कि साइबर अपराधी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और तकनीकी सुरक्षा ही इस प्रकार के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।






