अभिषेक बनर्जी हमला मामला: छह आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने कहा- बड़ी साजिश की आशंका
सोनारपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित धक्का-मुक्की और पथराव के बाद रातभर चला तलाशी अभियान, CCTV फुटेज से हुई पहचान
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला सिर्फ अचानक भड़के विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका भी जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं।
घटना के बाद शनिवार रात से ही सोनारपुर पुलिस स्टेशन की टीम ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। इलाके में लगे विभिन्न सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसके साथ ही स्थानीय लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया कर्मियों के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुए वीडियो फुटेज को भी जांच के दायरे में लिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच के दौरान कई संदिग्ध चेहरों की पहचान की गई। इसके बाद रातभर विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घटना की योजना किसने बनाई और इसमें कितने लोग शामिल थे।
वीडियो फुटेज बना जांच का सबसे बड़ा आधार
जांचकर्ताओं का कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो इस मामले में सबसे अहम सबूत बनकर सामने आए हैं। फुटेज में कथित तौर पर कुछ लोग अभिषेक बनर्जी के काफिले को घेरते, नारेबाजी करते और उन पर अंडे व ईंटें फेंकते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच के जरिए वीडियो में दिख रहे अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। जांच में कई ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि इस घटना में और भी कई लोगों की भूमिका हो सकती है।
कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें सार्वजनिक कर्तव्य में बाधा डालना, कानून-व्यवस्था भंग करना, सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करना और अशांति फैलाने जैसी धाराएं शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि जांच निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना शनिवार को उस वक्त हुई जब अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही उनका काफिला इलाके में पहुंचा, कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को घेर लिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान “चोर-चोर” के नारे लगाए गए और अभिषेक बनर्जी की ओर अंडे व ईंटें फेंकी गईं।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि सुरक्षा कारणों से अभिषेक बनर्जी को कुछ दूरी तक गाड़ी से उतरकर पैदल आगे बढ़ना पड़ा। उनके चारों ओर सुरक्षाकर्मियों का घेरा बना रहा।
पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे विपक्ष की सुनियोजित साजिश बताया है। घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती कुछ मिनटों तक हालात तनावपूर्ण बने रहे। यही वजह है कि अब सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की मांग भी उठने लगी है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह हमला पूर्व नियोजित था और इसका मकसद राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना था। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह घटना जनता के आक्रोश का स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन थी। हालांकि पुलिस फिलहाल किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है और सिर्फ सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
और गिरफ्तारियां संभव
जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके पास कुछ और संदिग्धों के खिलाफ अहम सुराग हैं। पुलिस विभिन्न इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरे मामले पर राज्य की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या नए खुलासे सामने आते हैं और क्या यह मामला वास्तव में किसी बड़ी राजनीतिक साजिश से जुड़ा है।






