सदन में CM हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला: 14वीं JPSC में उम्र सीमा पर राहत, कट-ऑफ 2022 से होगी तय

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2025 के अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि उम्र सीमा में छूट के आकलन की कट-ऑफ ईयर अब 2026 की जगह 2022 मानी जाएगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में मौजूद विधायकों ने मेज थपथपाकर फैसले का स्वागत किया और लंबे समय से परेशान अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी।

क्यों उठा था विवाद?
दरअसल, JPSC द्वारा जारी अधिसूचना में उम्र सीमा की गणना वर्ष 2026 के आधार पर तय की गई थी। इस निर्णय से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो गए थे, जो पिछले नियमों और परीक्षाओं के आधार पर पात्र माने जा रहे थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि 2016-17 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं और 2021 की नियमावली में ऊपरी उम्र सीमा में छूट का प्रावधान था, लेकिन नए कट-ऑफ के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
उम्र सीमा विवाद को लेकर कई अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ताओं को आवेदन भरने की अनुमति दी थी और स्पष्ट किया था कि उनका अंतिम परिणाम कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय है। सरकार के ताजा फैसले के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि विवाद काफी हद तक शांत हो सकता है।

सदन में उठा मुद्दा, सरकार ने दिखाई गंभीरता
विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इस मसले को प्रमुखता से उठाया था और सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की थी। संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने भी सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत दिए थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब आवेदन की तिथि बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

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और राहत की मांग भी उठी
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने कट-ऑफ डेट को 2020 से पहले करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि पिछले 25 वर्षों में JPSC ने सीमित परीक्षाएं कराई हैं, इसलिए युवाओं के भविष्य को देखते हुए और उदार फैसला लिया जाना चाहिए। वहीं झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लंबे समय से चल रहा विवाद खत्म होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

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अभ्यर्थियों के लिए क्या बदलेगा?
कट-ऑफ ईयर को 2026 से घटाकर 2022 करने के फैसले से वे सभी अभ्यर्थी लाभान्वित होंगे जो सिर्फ उम्र सीमा के कारण परीक्षा से बाहर हो गए थे। अब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए आवेदन का रास्ता खुलने की संभावना है। राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इस निर्णय को युवाओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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