भारत-ओमान CEPA लागू, संकट के दौर में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा
1 जून से लागू हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता, हॉरमुज संकट के बीच भारत के लिए रणनीतिक राहत
नई दिल्ली: भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आज यानी 1 जून 2026 से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। थिंक टैंक Global Trade Research Initiative (GTRI) के अनुसार, यह समझौता सिर्फ एक व्यापारिक करार नहीं बल्कि मौजूदा वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए एक मजबूत रणनीतिक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
हॉरमुज संकट के बीच ओमान बना भरोसेमंद विकल्प
इस समझौते की सबसे बड़ी ताकत ओमान की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है। मौजूदा समय में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से Strait of Hormuz से गुजरने वाला समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। तनाव बढ़ने से सऊदी अरब, कतर और United Arab Emirates से भारत को होने वाली तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
लेकिन ओमान की अधिकांश तटरेखा सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़ी है, जो विवादित हॉरमुज मार्ग से काफी हद तक सुरक्षित है। इसका मतलब है कि संकट के समय भी ओमान के प्रमुख बंदरगाह भारत के लिए सुरक्षित सप्लाई चैन बनाए रख सकते हैं।
GTRI ने बताया रणनीतिक गेमचेंजर
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि ओमान संकट के समय भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक और ऊर्जा गलियारा साबित हो सकता है। उनके मुताबिक यह समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को अस्थिर वैश्विक हालात में ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
आंकड़े बता रहे ओमान की बढ़ती अहमियत
क्षेत्रीय तनाव के चलते अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच खाड़ी देशों से भारत का आयात 15 अरब डॉलर से घटकर 9.8 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में भारत का निर्यात भी 4.4 अरब डॉलर से घटकर 2.7 अरब डॉलर पर आ गया। लेकिन इन चुनौतीपूर्ण हालात के बीच Oman भारत के लिए अपवाद साबित हुआ। इस दौरान ओमान से भारत का आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर 430 मिलियन डॉलर से 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं ओमान को भारत का निर्यात केवल 10.3 प्रतिशत ही घटा, जो अन्य खाड़ी देशों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति दर्शाता है।
भारत को क्या मिलेगा फायदा
इस समझौते के तहत ओमान ने भारत से जाने वाले 98 प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क तत्काल खत्म कर दिया है। भारत ने वित्त वर्ष 2026 में ओमान को लगभग 4 अरब डॉलर का निर्यात किया था। इसमें पेट्रोल, नैफ्था, एल्युमिना, लोहा-स्टील, मशीनरी और बासमती चावल जैसे उत्पाद शामिल हैं। पहले कुछ उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, जो अब समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
ओमान को भी मिलेगा बड़ा फायदा
भारत भी ओमान से आने वाले 78 प्रतिशत उत्पादों पर टैक्स कम या समाप्त करेगा। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर का आयात किया था। इसमें कच्चा तेल, LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरक प्रमुख हैं। इससे भारत को ऊर्जा और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति अधिक स्थिर और सस्ती होने की संभावना है।
छोटा बाजार, लेकिन बड़ा रणनीतिक महत्व
हालांकि ओमान की आबादी करीब 55 लाख है और उसकी अर्थव्यवस्था लगभग 110 अरब डॉलर की है, इसलिए भारत के निर्यात में बहुत बड़ी छलांग की उम्मीद नहीं की जा रही। लेकिन रणनीतिक दृष्टि से यह समझौता बेहद अहम है क्योंकि यह भारत को उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल और ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता
यह पिछले पांच वर्षों में भारत का पांचवां और कुल 15वां मुक्त व्यापार समझौता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच यह समझौता भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देगा और आने वाले समय में भारत-ओमान संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।






