भारतीय रिजर्व बैंक: 2000 रुपये के 98.21% नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस, केवल 6,366 करोड़ रुपये मूल्य के नोट प्रचलन में बचे
rbiमुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को जानकारी दी कि 2000 रुपये के 98.21% बैंक नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके हैं। आरबीआई के अनुसार, अब केवल 6,366 करोड़ रुपये मूल्य के 2000 रुपये के नोट ही जनता के पास बचे हुए हैं।
2000 रुपये के नोटों की वापसी की प्रक्रिया
भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये के बैंक नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी। इस निर्णय के तहत बैंकों को इन नोटों को स्वीकार करने और बदलने की अनुमति दी गई थी। घोषणा के समय (19 मई 2023) प्रचलन में 2000 रुपये के नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। 31 मार्च 2025 तक, यह घटकर केवल 6,366 करोड़ रुपये रह गया है। इसका मतलब है कि अब तक 98.21% नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके हैं।
2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की प्रक्रिया
भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों को 2000 रुपये के नोट बैंकों में जमा करने और बदलने के लिए 7 अक्टूबर 2023 तक का समय दिया था। इस दौरान, बैंकों ने बड़ी संख्या में 2000 रुपये के नोटों को वापस लिया। 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बैंकों में 2000 रुपये के नोट बदलने की सुविधा बंद कर दी गई। हालांकि, रिज़र्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में अभी भी 2000 रुपये के नोट जमा किए जा सकते हैं या बदले जा सकते हैं।
2000 रुपये के नोट अब भी कैसे बदले या जमा किए जा सकते हैं?
अगर किसी व्यक्ति के पास अब भी 2000 रुपये के नोट हैं, तो वे निम्नलिखित तरीकों से इन्हें बैंक खाते में जमा कर सकते हैं या बदल सकते हैं:
- रिज़र्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में जाकर – व्यक्ति और संस्थाएं अब भी इन कार्यालयों में जाकर 2000 रुपये के नोट अपने बैंक खातों में जमा करा सकते हैं।
- भारतीय डाक के माध्यम से – यदि कोई व्यक्ति सीधे आरबीआई के कार्यालय नहीं जा सकता, तो भारतीय डाक सेवा का उपयोग करके किसी भी RBI कार्यालय में नोट भेजकर अपने बैंक खाते में जमा कर सकता है।
क्या 2000 रुपये के नोट अब भी वैध हैं?
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि 2000 रुपये के नोट अब भी वैध मुद्रा बने रहेंगे। इसका मतलब है कि इन्हें कानूनी तौर पर लेन-देन में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, आम जनता को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द इन नोटों को बैंक में जमा कर दें या बदल लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।
सरकार और आरबीआई का उद्देश्य
2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लेने के पीछे मुख्य उद्देश्य था:
- नकदी के प्रवाह को नियंत्रित करना – 2000 रुपये के नोट बड़े मूल्य के होते हैं और इन्हें अक्सर काले धन के रूप में संग्रहीत किया जाता था।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना – सरकार डिजिटल इंडिया पहल को बढ़ावा दे रही है, जिससे नकदी लेन-देन में कमी लाई जा सके।
- सतर्कता और पारदर्शिता – 2000 रुपये के नोटों के जरिए अवैध वित्तीय गतिविधियों और नकली नोटों के चलन को रोकना।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 19 मई 2023 को 2000 रुपये के बैंक नोटों को वापस लेने की घोषणा के बाद से अब तक 98.21% नोट बैंकिंग प्रणाली में लौट चुके हैं। अब केवल 6,366 करोड़ रुपये के नोट जनता के पास बचे हैं। हालांकि, 2000 रुपये के नोट अभी भी वैध मुद्रा बने रहेंगे और लोग इन्हें रिज़र्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में जाकर या भारतीय डाक के माध्यम से बैंक खातों में जमा कर सकते हैं।
सरकार और आरबीआई का यह कदम काले धन पर लगाम लगाने, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






