बीएसएनएल अधिकारी को आय से अधिक संपत्ति मामले में 3 साल की सजा
रांची की CBI विशेष अदालत ने 25 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया, 2007 से चल रहा था मामला
रांची: राजधानी रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बीएसएनएल हजारीबाग के तकनीकी अधिकारी राम विनोद सिंह को दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी अधिकारी पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सुनाया।
2007 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2007 का है, जब सीबीआई ने कांड संख्या RC 02(A)/2007 के तहत जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि राम विनोद सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सेवा अवधि के दौरान अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।
34 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति का खुलासा
सीबीआई की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकारी ने लगभग 34 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की थी। जांच के दौरान आरोपी इस संपत्ति का संतोषजनक हिसाब अदालत और जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं कर सके।
दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
मामले की जांच सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, रांची ने की। सुनवाई के दौरान एजेंसी ने अदालत में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह पेश किए। सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक दविंदर पाल सूद ने पक्ष रखा। सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(e) और 13(2) के तहत दोषी पाया।
जुर्माना नहीं भरने पर एक साल अतिरिक्त जेल
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि दोषी अधिकारी को तीन साल की सश्रम कारावास के साथ 25 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। यदि वह तय समय सीमा में जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे एक वर्ष की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतनी पड़ेगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। करीब 19 साल पुराने इस मामले में फैसला आने के बाद सरकारी विभागों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। इसे सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामलों में कानून से बचना आसान नहीं होगा।





