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ED की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी समेत शीर्ष अफसरों को नोटिस

Mamata Banerjee

I-PAC CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

New Delhi/Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच I-PAC परिसर में हुई कथित “दखलअंदाजी” को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ED की याचिका पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों—DGP, पुलिस कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर समेत अन्य को नोटिस जारी किया है।

ED का आरोप है कि I-PAC परिसर में जांच के दौरान मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों ने जांच में जबरन हस्तक्षेप किया, जिससे ED की कार्रवाई बाधित हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि I-PAC परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखी जाए, ताकि जांच में वीडियो साक्ष्य से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। कोर्ट ने आदेश में कहा कि दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाए और अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।

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FIR पर भी रोक, कार्रवाई पर सवाल
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। ये FIR उन ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी, जो I-PAC में जांच के लिए गए थे। कोर्ट ने FIR पर रोक लगाकर साफ संकेत दिया कि जब मामला न्यायिक जांच की सीमा में है, तब किसी एजेंसी पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं।

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अब क्या होगा?
अब इस केस में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि I-PAC में ED की कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक हस्तक्षेप का आरोप किस हद तक सही है। साथ ही, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

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यह प्रकरण केवल जांच की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकार बनाम केंद्रीय एजेंसी टकराव का राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम भी जुड़ गया है।

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