JPSC में कथित अनियमितताओं पर भाजपा का हल्ला बोल, 21 जुलाई को मशाल जुलूस और 22 जुलाई को रांची में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
JPSC को लेकर भाजपा का आंदोलन तेज, प्रेस कॉन्फ्रेंस में NEET पर भी बहस
बोकारो से नीरज सिंह: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बोकारो में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जेपीएससी की चयन प्रक्रिया लगातार विवादों में रही है और इससे राज्य के हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। पार्टी ने घोषणा की कि 21 जुलाई को बोकारो में मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जबकि 22 जुलाई को रांची में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर सरकार को घेरा जाएगा।
हालांकि प्रेस वार्ता के दौरान माहौल तब और दिलचस्प हो गया, जब पत्रकारों ने भाजपा नेताओं से NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर भी सवाल पूछ लिए। इसके बाद कुछ देर तक JPSC और NEET दोनों मुद्दों पर सवाल-जवाब का दौर चलता रहा।
जेपीएससी में पारदर्शिता नहीं, युवाओं का भविष्य दांव पर : भाजपा
बोकारो परिसदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भाजपा नेताओं ने कहा कि झारखंड में युवाओं के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उनका आरोप था कि जेपीएससी की परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन सरकार इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी होती है। यदि चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो युवाओं का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाता है। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक विरोध के लिए आंदोलन नहीं कर रही है, बल्कि उन हजारों युवाओं की आवाज बन रही है, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है।

21 जुलाई को बोकारो में मशाल जुलूस, 22 जुलाई को रांची में बड़ा प्रदर्शन
भाजपा और भाजयुमो ने आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित कर दी है। पार्टी के अनुसार 21 जुलाई को बोकारो में मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके अगले दिन 22 जुलाई को राजधानी रांची में प्रदेशभर से कार्यकर्ता जुटेंगे और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभ्यर्थी और युवा भी शामिल होंगे। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार ने अभ्यर्थियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
पत्रकारों ने पूछा- JPSC पर आक्रामक, NEET पर चुप क्यों?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि पार्टी जेपीएससी के मुद्दे पर तो सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही है, लेकिन NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले में उतनी मुखर क्यों नहीं दिखाई देती।
पत्रकारों ने यह भी पूछा कि यदि परीक्षा में पारदर्शिता की बात की जा रही है, तो यह सिद्धांत सभी प्रतियोगी परीक्षाओं पर समान रूप से लागू होना चाहिए। इस सवाल के जवाब में भाजपा नेताओं ने कहा कि NEET मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उनका कहना था कि किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी स्वीकार्य नहीं है और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रेस वार्ता में दोनों मुद्दे बने चर्चा का केंद्र
प्रेस वार्ता के दौरान JPSC और NEET दोनों मुद्दों को लेकर लंबी चर्चा हुई। भाजपा नेताओं ने एक ओर झारखंड सरकार पर जेपीएससी को लेकर निशाना साधा, वहीं पत्रकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे NEET विवाद पर भी पार्टी का पक्ष जानने की कोशिश की। इस दौरान कई सवाल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और सरकारों की जवाबदेही को लेकर भी उठे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
युवाओं के मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज
झारखंड में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठने वाले सवाल राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा मुद्दा बनते जा रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब 21 और 22 जुलाई को प्रस्तावित आंदोलन पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विरोध प्रदर्शन का राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या असर पड़ता है।






