डी.ए.वी. नंदराज पब्लिक स्कूल में पूर्व निदेशक एन.डी. ग्रोवर की पुण्यतिथि श्रद्धा से मनाई गई

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रांची : शुक्रवार, 06 फरवरी 2026 को डी.ए.वी. नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू में डी.ए.वी. संस्थाओं के पूर्व निदेशक नारायण दास ग्रोवर की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां हवन-यज्ञ के साथ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

एन.डी. ग्रोवर साहब को पूर्वी भारत के शिक्षा जगत में आज भी एक चमकते सितारे के रूप में याद किया जाता है। डी.ए.वी. कॉलेज, हिसार (हरियाणा) से सेवा निवृत्त होने के बाद उन्होंने रांची को अपनी कर्मभूमि बनाया और शिक्षा के विस्तार को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया। उनके कार्यकाल में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नेपाल और मध्य प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में लगभग 200 डी.ए.वी. स्कूलों की स्थापना हुई, जो आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बने हुए हैं।

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खूंटी से था विशेष लगाव
एन.डी. ग्रोवर साहब का झारखंड के खूंटी क्षेत्र से विशेष लगाव था। वे अक्सर कहा करते थे कि यदि उन्हें पुनर्जन्म मिले, तो वे खूंटी में किसी आदिवासी परिवार में जन्म लेकर समाज सेवा करना चाहेंगे। उनके हाथ पर लिखा वाक्य “यह जीवन खूंटी के लिए” आज भी उनके समाज-समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने वहां नियमित रूप से नेत्रदान शिविरों का आयोजन कराया और उनके परोपकारी कार्य आज भी उनके अनुयायियों द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

“चलता-फिरता स्कूल” कहलाते थे ग्रोवर साहब
ग्रोवर साहब को लोग स्नेहपूर्वक “चलता-फिरता स्कूल” कहा करते थे। शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, अनुशासन और पारदर्शिता उन्हें अन्य शिक्षाविदों से अलग बनाती थी। वे बच्चों से सीधे संवाद करने में विश्वास रखते थे और हमेशा नैतिक मूल्यों पर जोर देते थे।

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प्राचार्य ने साझा की स्मृतियां
हवन के बाद आयोजित प्रातःकालीन सभा को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविप्रकाश तिवारी ने ग्रोवर साहब से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में धनबाद प्रवास के दौरान उन्होंने ग्रोवर साहब को करीब से देखा था। उनकी तेज चाल, बच्चों से संवाद की इच्छा और कार्यशैली में पारदर्शिता प्रेरणादायी थी। डॉ. तिवारी ने उनके प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए कहा—
“जो बच्चे फूल नहीं तोड़ते, वे निश्चित ही अच्छे बच्चे होते हैं।”
उन्होंने कहा कि ग्रोवर साहब का जीवन शून्य से शिखर तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है।

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संस्कृत सभा में बच्चों ने व्यक्त किए भाव
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। विशेष बात यह रही कि आज की सभा संस्कृत भाषा में आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने उद्गार प्रस्तुत कर शिक्षा, सेवा और संस्कार के महत्व को रेखांकित किया।

पुण्यतिथि कार्यक्रम ने न केवल एन.डी. ग्रोवर साहब के शिक्षा और समाज सेवा के योगदान को स्मरण कराया, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा भी दी।

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