I-PAC दफ्तर पर ED की रेड का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, सियासी संग्राम तेज

TMC vs ED

मुनादी Live डेस्क : चुनाव रणनीतिकार कंपनी I-PAC के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। अब यह मामला सीधे कोलकाता हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां इस पर सुनवाई शुरू हो चुकी है।

ED, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और I-PAC—तीनों की ओर से हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अदालत ने मामले की लाइव सुनवाई का फैसला किया है, हालांकि कोर्ट रूम में केवल संबंधित पक्षों के वकीलों को ही मौजूद रहने की अनुमति दी गई है।

हाईकोर्ट में सुनवाई पर क्या-क्या हुआ
सुनवाई के दौरान ED की ओर से अदालत से मामले को स्थगित करने की अपील की गई। एजेंसी का कहना है कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में हाईकोर्ट में सुनवाई उचित नहीं है।

ED ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका को “झूठी और भ्रामक” बताया। जांच एजेंसी का दावा है कि याचिका पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति छापेमारी के वक्त मौके पर मौजूद ही नहीं था।

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I-PAC की गैरमौजूदगी पर ED का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत में I-PAC की ओर से कोई प्रतिनिधि या वकील मौजूद नहीं था। इस पर ED ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट से मांग की कि I-PAC को तलब किया जाए, ताकि उसका पक्ष भी स्पष्ट रूप से सामने आ सके।

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ED का बड़ा आरोप: “कुछ भी जब्त नहीं किया गया”
ED ने कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एजेंसी ने कोई भी दस्तावेज या डिजिटल डेटा जब्त नहीं किया।
ED के मुताबिक,

“छापेमारी के दौरान सारे रिकॉर्ड और दस्तावेज खुद ममता बनर्जी और उनके सहयोगी अपने साथ लेकर चले गए थे।”

ED ने CBI जांच की मांग की
ED ने अदालत में आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान जांच में बाधा डाली गई और दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य जबरन छीने गए। इसी आधार पर एजेंसी ने पूरे घटनाक्रम की CBI जांच कराने की मांग रखी है।

बता दें कि इससे पहले अदालत कक्ष में अव्यवस्था और भारी भीड़ के चलते शुक्रवार को सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।

TMC का पलटवार: गोपनीय दस्तावेज जब्त करने का आरोप
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ED पर गंभीर आरोप लगाए हैं। TMC का कहना है कि जांच एजेंसी ने पार्टी से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, रणनीतिक सूचनाएं और डेटा अपने कब्जे में लेने की कोशिश की।

TMC का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और चुनाव से पहले पार्टी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ED ने कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत I-PAC के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। इसी छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया और मामला अब न्यायिक मोर्चे पर पहुंच चुका है।

आगे क्या?
हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट में चल रही प्रक्रिया के फैसले से यह तय होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर न्यायिक मोहर किसके पक्ष में लगती है।

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