21 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया
प्रदर्शनकारियों ने किया विरोध
नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को 21 दिनों से जारी भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। जानकारी के अनुसार, लंबे समय से अनशन पर बैठे वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनका लगभग 9 किलोग्राम वजन कम हो गया है। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया।
अस्पताल ले जाने के दौरान हुआ विरोध
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पुलिस वांगचुक को अस्पताल ले जाने पहुंची तो उनके समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वांगचुक अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे थे और उनकी सहमति के बिना उन्हें हटाया जाना उचित नहीं है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए एहतियातन उठाया गया।
21 दिनों से जारी था अनशन
सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। अनशन के दौरान उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर होता गया और उनका वजन करीब 9 किलो घटने की जानकारी सामने आई है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक उपवास के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई थी।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन क्षेत्र के लोगों के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मांगों को लेकर चलाया जा रहा है।
प्रशासन की नजर स्वास्थ्य पर
प्रशासन का कहना है कि वांगचुक का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में कराया जा रहा है। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर, उनके समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद एक बार फिर उनके आंदोलन और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।





