घाटशिला में सियासी जंग: चंपाई भावुक, हेमंत ने साधा निशाना

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किसी ने कहा ‘बैल’, तो किसी ने बोला ‘गद्दार’; भावनाओं और आरोपों के बीच झारखंड की सियासत में गर्मी

घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम): झारखंड की राजनीति में इन दिनों घाटशिला उपचुनाव सबसे चर्चित मुद्दा बना हुआ है। शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर 11 नवंबर को मतदान होना है। प्रचार के आखिरी दिन बेहद भावनात्मक और राजनीतिक हमलों से भरा रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घाटशिला के काशिदा मैदान में बड़ी जनसभा की। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के आंसुओं ने मंच पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।

“ यह चुनाव सम्मान और भावनाओं का है” — हेमंत सोरेनमुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा,

“यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट जीतने का नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता बचाने का चुनाव है।
हम अपने दिवंगत साथी रामदास सोरेन के सपनों को पूरा करेंगे।”

हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि “जो लोग झारखंड के अधिकारों पर राजनीति करते हैं, वे आज जनता के बीच ‘बैल’ बनकर घूम रहे हैं।”

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उन्होंने आगे कहा —

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“घाटशिला की जनता झूठे वादों के पीछे नहीं जाएगी। इस बार झारखंड की मिट्टी तय करेगी कि हक और हुकूमत किसकी होगी।”

चंपाई सोरेन की आंखें नम, कहा — ‘रामदास मेरे बेटे जैसे थे’ पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भावनाओं में डूबे स्वर में कहा,“रामदास मेरे बेटे जैसे थे। उनका सपना था कि घाटशिला का हर बच्चा पढ़े और आगे बढ़े। आज वही सपना पूरा करने के लिए हम सब एकजुट हैं।” उनकी यह बात सुनते ही मंच पर मौजूद कार्यकर्ता और समर्थक भावुक हो उठे। सभा स्थल पर “झारखंड बचाओ” और “जय झामुमो” के नारे गूंजने लगे।

बीजेपी ने पलटवार किया, कहा — “गद्दारों की सरकार” दूसरी ओर, बीजेपी ने झामुमो पर तीखा हमला बोला।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और सांसद बिद्युत बरन महतो ने अपने भाषण में कहा कि

“यह सरकार गद्दारों की है, जिन्होंने जनता से वादे करके धोखा दिया। रोजगार, भ्रष्टाचार और घोटालों से झारखंड त्रस्त है।”

बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि
“झामुमो सिर्फ सहानुभूति की राजनीति कर रही है, लेकिन जनता विकास चाहती है, न कि भावनाओं का तमाशा।”

शांत हुआ प्रचार, अब मतदाताओं की बारी
शनिवार शाम 5 बजे के बाद प्रचार थम गया। अब घाटशिला की जनता 11 नवंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी। मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

जिले के कुल 2.18 लाख मतदाता 12 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।
मुख्य मुकाबला झामुमो के सुकुमार सोरेन और बीजेपी की मंजू बाला सिंह के बीच माना जा रहा है। घाटशिला उपचुनाव झारखंड की राजनीति का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। जहां एक ओर भावनात्मक अपीलें और विकास के वादे हैं,
वहीं दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक सियासत का चरम भी।

अब देखना यह है कि चंपाई सोरेन के आंसू और हेमंत की अपील जनता के वोट में कितना असर दिखा पाते हैं।

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