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‘मैं शपथ लेता हूं…’ संविधान हाथ में लेकर DK शिवकुमार बने कर्नाटक के मुख्यमंत्री, जानिए उनका पूरा सियासी सफर

Karnataka CM

कांग्रेस के संकटमोचक को मिला राज्य की कमान, जी परमेश्वर बने डिप्टी सीएम; 12 अन्य मंत्रियों ने भी ली शपथ

बेंगलुरु: लंबे राजनीतिक इंतजार, संगठनात्मक संघर्ष और कांग्रेस के भीतर वर्षों तक चली खींचतान के बाद आखिरकार डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। बुधवार को बेंगलुरु स्थित लोकभवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने राज्य के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह की सबसे चर्चित तस्वीर वह रही, जब डीके शिवकुमार ने हाथ में भारत का संविधान लेकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ के बाद उन्होंने मंच से झुककर जनता का अभिवादन किया और उपस्थित नेताओं का अभार जताया।

वंदे मातरम से हुई समारोह की शुरुआत
शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम से हुई। इस अवसर पर कांग्रेस नेतृत्व के साथ-साथ इंडिया गठबंधन शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। समारोह शुरू होने से पहले डीके शिवकुमार ने मंच पर मौजूद नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गले लगाकर उनका अभिवादन किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

जी परमेश्वर बने डिप्टी सीएम
डीके शिवकुमार के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा 12 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार का हिस्सा बने। नए मंत्रिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को भी जगह दी गई है। इसे कांग्रेस नेतृत्व द्वारा संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

तीन साल के इंतजार के बाद मिली कुर्सी
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता आसान नहीं था। पिछले करीब तीन वर्षों से उनके समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री पद पर देखने की मांग कर रहे थे। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा बनी हुई थी। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। आखिरकार हाल ही में सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया।

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कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ क्यों कहलाते हैं डीके शिवकुमार?
डीके शिवकुमार को कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है। जब भी पार्टी को राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा, उन्होंने संगठन को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने से लेकर कई राज्यों में राजनीतिक संकट के दौरान पार्टी के लिए रणनीतिक भूमिका निभाने तक, डीके शिवकुमार ने खुद को एक मजबूत संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया।

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उनकी इसी क्षमता के कारण कांग्रेस नेतृत्व का उन पर भरोसा लगातार बढ़ता गया।

छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर
डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने युवा कांग्रेस के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे कर्नाटक की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए। वे कई बार विधायक चुने गए और राज्य सरकार में ऊर्जा, सिंचाई तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों में उनके अनुभव को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें राज्य की कमान सौंपी है।

अब सामने हैं बड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री बनने के बाद डीके शिवकुमार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। उन्हें सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ चुनावी वादों को भी जमीन पर उतारना होगा। इसके अलावा कांग्रेस के भीतर विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलना और आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। फिलहाल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के इस नए अध्याय पर पूरे देश की नजर है। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करेगी।

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