रांची में जमीन म्यूटेशन पर बड़ा खुलासा! सरकारी रिकॉर्ड गायब, जांच तेज
रांची: राजधानी रांची के नामकुम अंचल में कथित भूमि म्यूटेशन अनियमितताओं का मामला अब गंभीर जांच के दौर में पहुंच गया है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। एजेंसी ने पीई (प्रारंभिक जांच) संख्या-3/2026 दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद ACB अब राजस्व रिकॉर्ड, म्यूटेशन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
कई अधिकारी जांच के घेरे में
जांच के दायरे में तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) डॉ. श्वेता वर्मा, डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार सहित कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी या दोष तय नहीं हुआ है। ACB उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
डुंडू गांव की 1.22 एकड़ जमीन के दस्तावेज गायब
ACB की प्रारंभिक जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि डुंडू गांव की 1.22 एकड़ जमीन से जुड़े म्यूटेशन प्रकरण के मूल दस्तावेज नामकुम अंचल कार्यालय से उपलब्ध नहीं हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन संबंधित फाइलें और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। यही वजह है कि जांच अब केवल म्यूटेशन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सरकारी अभिलेखों के गायब होने की परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है।
मिलीभगत की आशंका की भी जांच
ACB इस मामले को महज प्रशासनिक लापरवाही मानकर नहीं चल रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों को जानबूझकर हटाया या गायब तो नहीं किया गया। यदि जांच में किसी प्रकार की साजिश या अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी जांच
यह मामला थॉमस साइमन द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। मामले की सुनवाई के दौरान 18 जुलाई को झारखंड हाईकोर्ट ने ACB को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ACB ने दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड सत्यापन और संबंधित अधिकारियों से जुड़े तथ्यों को एकत्र करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
बुढ़मू मामले के बाद बढ़ी सख्ती
हाल ही में बुढ़मू अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी को कथित रूप से गलत भूमि म्यूटेशन के मामले में ACB गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। इसी पृष्ठभूमि में नामकुम का मामला भी एजेंसी की प्राथमिकता में शामिल हो गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या दोनों मामलों में कार्यप्रणाली या अन्य स्तर पर कोई समानता है।
आगे क्या होगा?
ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट झारखंड हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो एजेंसी नियमित प्राथमिकी दर्ज कर आगे की आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और किसी भी अधिकारी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या दोष तय होना जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।






