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TMC में बड़ी टूट की अटकलें, 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चा से सियासी हलचल

TMC

दिल्ली में नेताओं की बैठकों के बाद तेज हुई चर्चाएं, पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित असंतोष और सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद अलग राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हाल के दिनों में हुई कुछ महत्वपूर्ण बैठकों के बाद इन चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलने के लिए समय भी मांगा है। हालांकि, अभी तक न तो टीएमसी और न ही संबंधित नेताओं की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि की गई है।

भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बढ़ीं चर्चाएं
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के कुछ सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात को लेकर विपक्षी खेमे और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

राज्यसभा में भी बढ़ी हलचल
इस बीच, राज्यसभा में टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे की खबरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
यदि सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलें सही साबित होती हैं, तो इसका असर न केवल संसद में टीएमसी की ताकत पर पड़ेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल यह पूरा मामला चर्चाओं और सूत्रों के दावों तक सीमित है।

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आधिकारिक घोषणा का इंतजार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक संबंधित सांसदों, टीएमसी नेतृत्व या लोकसभा सचिवालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, दिल्ली और कोलकाता दोनों की राजनीतिक नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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