बजट 2026 से पहले इनकम टैक्स में बड़ी राहत की उम्मीद
शादीशुदा लोगों के लिए आ सकती है Joint Tax Filing व्यवस्था
मुनादी Live डेस्क : साल 2026 के बजट से पहले एक बार फिर इनकम टैक्स (Income Tax) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आम टैक्सपेयर्स के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या पिछली बार की तरह इस बार भी सरकार टैक्स में कोई बड़ी राहत देगी? 2025 में 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किए जाने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार टैक्स सिस्टम में एक और बड़ा बदलाव कर सकती है।
इन चर्चाओं के बीच ICAI यानी देश के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था ने वित्त मंत्रालय को कुछ अहम प्री-बजट सुझाव दिए हैं। इनमें सबसे बड़ा सुझाव है — शादीशुदा लोगों को ऑप्शनल Joint Tax Filing की अनुमति देना।
क्या है Joint Tax Filing का प्रस्ताव?
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो पति और पत्नी दोनों मिलकर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर सकेंगे। मौजूदा सिस्टम में हर व्यक्ति को अलग-अलग टैक्स रिटर्न दाखिल करना होता है, चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। ICAI का मानना है कि मौजूदा इंडिविजुअल टैक्स सिस्टम परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता। खासकर उन परिवारों में जहां या तो केवल एक सदस्य कमाता है या पति-पत्नी की आय में बड़ा अंतर होता है।
मौजूदा सिस्टम में क्या है समस्या?
फिलहाल देश में:
- न्यू टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है
- ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है
अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, तो यह सिस्टम ठीक तरह से काम करता है। लेकिन सिंगल अर्नर फैमिली में गैर-कमाने वाले सदस्य की टैक्स छूट बेकार चली जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि परिवार जल्दी हाई टैक्स स्लैब में चला जाता है और कई बार इनकम शिफ्टिंग जैसे जटिल रास्ते अपनाने पड़ते हैं।
ICAI के मुताबिक, इससे टैक्स प्लानिंग मुश्किल हो जाती है और कंप्लायंस रिस्क भी बढ़ता है।
Joint Tax Filing कैसे करेगी काम?
ICAI ने जो मॉडल सुझाया है, उसके अनुसार:
- पति और पत्नी दोनों के पास वैलिड PAN होना जरूरी होगा
- दोनों मिलकर एक ITR फाइल कर सकेंगे
- बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट डबल हो जाएगी
यानी 8 लाख रुपये तक की फैमिली इनकम टैक्स फ्री टैक्स स्लैब, फैमिली इनकम के आधार पर तय होगा संभावित टैक्स स्लैब इस तरह हो सकते हैं:
- 0–8 लाख : 0% टैक्स
- 8–16 लाख : 5%
- 16–24 लाख : 10%
- 48 लाख से ऊपर : 30%
इसके अलावा, हर सैलरीड स्पाउस को अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा।
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
यह सिस्टम लागू होने पर:
- सिंगल अर्नर फैमिली को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा
- टैक्स छूट पूरे परिवार के लिए इस्तेमाल हो सकेगी
- एक ही रिटर्न फाइल करने से प्रक्रिया आसान होगी
- इनकम शिफ्टिंग की जरूरत कम होगी
- टैक्स चोरी और गलती की संभावना घटेगी
अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल जैसे देशों में पहले से ही Joint Tax Filing सिस्टम लागू है, जहां परिवार को एक Economic Unit माना जाता है।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि यह बदलाव आसान नहीं होगा। भारत का टैक्स सिस्टम पूरी तरह PAN-बेस्ड इंडिविजुअल फाइलिंग पर आधारित है। इसे लागू करने के लिए TDS, TCS और IT सिस्टम में बड़े बदलाव करने होंगे। इसके अलावा, हाई-इनकम ड्युअल अर्नर कपल के लिए जॉइंट फाइलिंग से टैक्स बोझ बढ़ भी सकता है। इसी वजह से ICAI ने सुझाव दिया है कि अगर यह व्यवस्था लाई जाए, तो इसे पूरी तरह ऑप्शनल रखा जाए।
बजट 2026 पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। अगर सरकार ICAI के इस सुझाव को स्वीकार करती है, तो यह मिडिल क्लास और सिंगल अर्नर परिवारों के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।






