भारत में आएंगे प्लास्टिक नोट? RBI कर रहा विचार, जानिए दुनिया का पहला Polymer Note कब आया

Plastic Notes in India

1988 में शुरू हुआ था प्लास्टिक नोट का सफर, आज 60 से ज्यादा देशों में चलन

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के एक बयान के बाद देश में प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने कहा है कि भारत में प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट (Polymer Notes) शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय मुद्रा प्रणाली में यह एक बड़ा बदलाव होगा। दुनिया के कई देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना जाता है।

दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट कब आया?
दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट वर्ष 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने जारी किया था। ऑस्ट्रेलिया ने अपने द्विशताब्दी वर्ष (Bicentennial Year) के अवसर पर 10 डॉलर का पहला पॉलीमर नोट जारी किया था। इस नोट को नकली मुद्रा की समस्या से निपटने और नोटों की उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने धीरे-धीरे अपनी पूरी मुद्रा प्रणाली को पॉलीमर नोटों में बदल दिया।

60 से अधिक देशों में चल रहे हैं प्लास्टिक नोट
आज दुनिया के 60 से अधिक देश पॉलीमर नोटों का उपयोग कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • कनाडा
  • यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन)
  • न्यूज़ीलैंड
  • सिंगापुर
  • मलेशिया
  • वियतनाम
  • मेक्सिको
  • नाइजीरिया
  • रोमानिया

जैसे कई देश शामिल हैं।

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इन देशों का मानना है कि पॉलीमर नोट लंबे समय तक टिकते हैं और सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होते हैं।

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प्लास्टिक नोट के क्या हैं फायदे?

  • ज्यादा टिकाऊ
    पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में दो से चार गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये जल्दी फटते नहीं हैं और नमी से भी कम प्रभावित होते हैं।
  • नकली नोट रोकने में मदद
    इन नोटों में पारदर्शी विंडो, विशेष सुरक्षा फीचर और जटिल डिजाइन शामिल किए जा सकते हैं, जिससे इन्हें नकली बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
  • साफ-सफाई में बेहतर
    प्लास्टिक नोट धूल, गंदगी और पानी से कम प्रभावित होते हैं। इसलिए इन्हें अधिक स्वच्छ माना जाता है।
  • लंबे समय में कम लागत
    हालांकि इनकी शुरुआती छपाई महंगी होती है, लेकिन अधिक समय तक चलने के कारण कुल लागत कम हो जाती है।
  • भारत में पहले भी हो चुकी है चर्चा
    भारत में पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा नई नहीं है। RBI और केंद्र सरकार पहले भी सीमित स्तर पर पॉलीमर नोटों के परीक्षण की संभावना पर विचार कर चुके हैं। कुछ वर्ष पहले कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर जैसे शहरों में परीक्षण की योजना पर चर्चा हुई थी, लेकिन इसे व्यापक स्तर पर लागू नहीं किया गया। अब RBI गवर्नर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर इस विषय पर चर्चा शुरू हो गई है।

RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश में प्लास्टिक नोटों को लेकर एक प्रस्ताव विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह प्रारंभिक स्तर पर है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में इसे लागू किया जाता है तो इसका उद्देश्य नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन को बेहतर बनाना होगा।

क्या बदल सकता है भारतीय मुद्रा का भविष्य?
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर के बावजूद नकदी का उपयोग भारत में अभी भी व्यापक है। ऐसे में यदि पॉलीमर नोट लागू होते हैं तो इससे नकली नोटों पर नियंत्रण, नोटों की लंबी उम्र और मुद्रा प्रबंधन की लागत में कमी जैसे कई फायदे मिल सकते हैं। फिलहाल देशवासियों को RBI के अंतिम फैसले का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि यदि भारत पॉलीमर नोटों को अपनाता है तो यह भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

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