ईरान ने ब्रिटिश बेस पर दागीं मिसाइलें, क्या भड़कने वाला है बड़ा युद्ध?
मुनादी लाइव : अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ लेता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने हिंद महासागर में स्थित US-UK के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया को निशाना बनाते हुए दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस हमले के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब ब्रिटेन भी सीधे इस युद्ध की चपेट में आ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिका को अपने सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। इस फैसले के तहत अमेरिका अब खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग कर सकता है। यही बात ईरान को नागवार गुजरी और उसने सीधा संदेश देने के लिए डिएगो गार्सिया को टारगेट किया।
निशाना चूका, लेकिन बढ़ा तनाव
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलें डिएगो गार्सिया बेस को सीधे तौर पर हिट नहीं कर पाईं। हालांकि, इस हमले को एक कड़े रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं, लेकिन यह संकेत साफ है कि ईरान अब संघर्ष को पश्चिम एशिया से बाहर भी फैलाने की क्षमता और मंशा दिखा रहा है।
UK को ईरान की खुली चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस घटना के बाद ब्रिटेन को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि ब्रिटेन अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान अब केवल अमेरिका और इजरायल ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगियों को भी सीधे निशाने पर ले सकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही चिंता
डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमले के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ गई है। यह बेस हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना माना जाता है। यहां से खाड़ी क्षेत्र और एशिया में कई रणनीतिक ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं।
ऐसे में इस बेस को निशाना बनाना सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती देने जैसा कदम माना जा रहा है।
ऊर्जा बाजार पर भी असर
इस युद्ध का असर अब ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमले की खबरें वैश्विक बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं।
क्या युद्ध और फैलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिटेन इस संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है। अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच था, लेकिन अब इसमें अन्य देशों के शामिल होने की आशंका बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, ईरान द्वारा डिएगो गार्सिया पर किया गया मिसाइल हमला इस युद्ध के एक नए और खतरनाक चरण की शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ब्रिटेन इस स्थिति पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह संघर्ष एक बड़े वैश्विक युद्ध की ओर बढ़ता है।






