अमेरिका ने फिर फोड़ा टैरिफ बम, भारत समेत 17 देशों पर 10% शुल्क; ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार

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अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया।

भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस महंगी होने का खतरा।

निर्यात, उद्योग और महंगाई पर पड़ सकता है दोहरा असर।

सरकार की अगली रणनीति पर बाजार की नजर।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक साथ दो बड़े झटके लगे हैं। एक ओर अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसके साथ ही कतर से LNG (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। इन घटनाक्रमों का असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में महंगाई और व्यापार पर पड़ सकता है।

भारत समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने नए व्यापारिक कदम के तहत भारत सहित 17 देशों के कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का फैसला किया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और व्यापार असंतुलन को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत के निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का दबाव बढ़ सकता है। इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, केमिकल और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।

तेल की कीमतों में तेज उछाल
इसी बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी झटका दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं।

कतर से LNG सप्लाई पर संकट की आशंका
तनाव का असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो कतर से LNG की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कतर उसका प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में LNG की सप्लाई प्रभावित होने पर बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, सीएनजी और पीएनजी की लागत बढ़ सकती है।

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भारत में महंगाई पर पड़ सकता है असर
यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल, परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ऊर्जा लागत बढ़ने से औद्योगिक उत्पादन महंगा होगा, जिसका असर विनिर्माण क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ सकता है।

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व्यापार और उद्योग के लिए दोहरी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती खड़ी हो सकती है। एक ओर अमेरिका का नया टैरिफ भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकता है, वहीं दूसरी ओर महंगे कच्चे तेल और संभावित LNG संकट से आयात बिल बढ़ने का खतरा है। यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो भारत की आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति और चालू खाते के संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार की रणनीति पर नजर
अब उद्योग जगत और बाजार की नजर भारत सरकार की रणनीति पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार वैकल्पिक निर्यात बाजारों की तलाश, ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण और घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है।

फिलहाल वैश्विक बाजार में निवेशकों और उद्योग जगत की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि व्यापार युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

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