जैसलमेर में 144 साल बाद बाहर आई जैन संत की पवित्र चादर, भव्य चादर महोत्सव में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मुनादी लाइव: राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जैसलमेर में एक अत्यंत दुर्लभ और भव्य धार्मिक आयोजन देखने को मिला, जब लगभग 144 वर्षों बाद जैन संत दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के पवित्र वस्त्र (चादर) पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बाहर निकाले गए। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित चादर महोत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण छा गया।
इस अनूठे धार्मिक आयोजन की शुरुआत शुक्रवार से हुई और कई दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में जैन समाज के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
872 साल पुराने पवित्र वस्त्रों के दर्शन
चादर महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण जैन संत Jinadatta Suri के लगभग 872 वर्ष पुराने पवित्र वस्त्र हैं। इन पवित्र वस्त्रों को लंबे समय से सुरक्षित रखा गया था और लगभग डेढ़ शताब्दी के बाद पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया।
जैसे ही इन पवित्र वस्त्रों को दर्शन के लिए रखा गया, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संत की चादर के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

भव्य शोभायात्रा और पुष्पवर्षा
इस ऐतिहासिक अवसर को और भी भव्य बनाने के लिए जैसलमेर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में एक विशेष पानी के जहाज के आकार का भव्य रथ तैयार किया गया, जिस पर संत की पवित्र चादर को स्थापित किया गया। शोभायात्रा के दौरान ड्रोन के माध्यम से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो उठा। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजनों और जयकारों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में शामिल हुए।
एक करोड़ मंत्रों का जाप
महोत्सव के दौरान जैन धर्म की परंपरा के अनुसार एक करोड़ मंत्रों का सामूहिक जाप भी किया जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रसार करना है।
श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस मंत्र जाप में भाग ले रहे हैं और पूरे आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी जैन समुदाय के श्रद्धालु पहुंचे हैं। जैसलमेर के मंदिरों और धर्मस्थलों में इन दिनों भारी भीड़ देखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि दर्शन और कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

धार्मिक आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
जैसलमेर में आयोजित यह चादर महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि जैन धर्म की समृद्ध परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।
लगभग डेढ़ शताब्दी बाद संत की पवित्र चादर के दर्शन होने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। इस आयोजन ने जैसलमेर को आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्र के रूप में एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।






