धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP का नया अल्टीमेटम, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग; अभिजीत दिपके का पुलिस को संदेश

Abhijit Dipke statement
dipika pandey sing
दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब अपना अगला एजेंडा सामने रख दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य 20 जुलाई और उसके बाद छात्रों एवं प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस कराना होगा। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा और आगे भी विभिन्न मुद्दों पर दबाव बनाया जाएगा।

अभिजीत दिपके का तीखा बयान
अभिजीत दिपके ने अपने बयान में कहा,

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Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school
Vedanta iron steel
आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़ 1
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

“ये तो सिर्फ़ एक मंत्री का इस्तीफा है… 20 जुलाई और उसके बाद छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लो। कॉकरोच से पंगा मत लेना। अगर हम एक मंत्री से इस्तीफा दिलवा सकते हैं, तो तुम पुलिस वाले हमारे लिए क्या हो?”

सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह
अनिल शर्मा सर
किशन जयसवाल
गोविंद मेवाड़
छोटू सिंह
जॉनी अग्रवाल
डॉ. राकेश सिंह
तिलक राज मंगलम
बंटी मोदी
मनोज अग्रवाल
मुकेश राम
राजू गुप्ता उर्फ जयनारायण साहू
राहुल कुमार उर्फ सोनू

उनके इस बयान को आंदोलन के अगले चरण की घोषणा और पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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छात्रों पर दर्ज मामलों को बनाया नया मुद्दा
CJP का कहना है कि आंदोलन के दौरान कई छात्रों और समर्थकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। संगठन का आरोप है कि ये मामले शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई के रूप में दर्ज किए गए और इन्हें वापस लिया जाना चाहिए। संगठन का दावा है कि जब तक इन मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक उसका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। हालांकि, यह मांग स्वीकार होगी या नहीं, इसका फैसला संबंधित सरकार और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

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पुलिस को लेकर तीखी टिप्पणी
अभिजीत दिपके ने अपने बयान में दिल्ली पुलिस को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन के दबाव में एक केंद्रीय मंत्री पद छोड़ सकते हैं, तो पुलिस प्रशासन को भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
हालांकि, पुलिस या गृह मंत्रालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

CJP की आगे की रणनीति
संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि अब आंदोलन केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहेगा। CJP आने वाले दिनों में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों, प्रदर्शनकारियों के अधिकार और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार जैसे मुद्दों को लेकर भी अभियान चलाएगी। सूत्रों के अनुसार, संगठन विभिन्न राज्यों में अपने समर्थकों के साथ बैठकें कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहा है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदर्शन का दायरा बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।

छात्र आंदोलन के बाद बदला राजनीतिक माहौल
हाल के दिनों में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर देशभर में व्यापक बहस देखने को मिली। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। इसी दौरान CJP भी सक्रिय रूप से आंदोलन का हिस्सा बना और उसने कई मांगों को लेकर सरकार के साथ वार्ता की। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपना ध्यान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर केंद्रित कर दिया है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल केंद्र सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने संबंधी CJP की नई मांग पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्राथमिकी या आपराधिक मामले को वापस लेने की प्रक्रिया संबंधित कानूनों, न्यायालयों और सक्षम सरकारी प्राधिकारियों के निर्णय के अनुसार होती है। इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।

आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार CJP की नई मांगों पर क्या रुख अपनाती है। यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, जबकि मांगें स्वीकार नहीं होने की स्थिति में संगठन देशव्यापी प्रदर्शन तेज करने का निर्णय ले सकता है। फिलहाल CJP ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर अपना अभियान जारी रखेगा, जबकि सरकार या पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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