ईरान-इजराइल जंग के 21वें दिन बड़ा धमाका, अली मोहम्मद नैनी की मौत के बीच तेहरान ने दागीं मिसाइलें

Iran Israel war day

मुनादी लाइव : ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच खबर है कि ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी जंग में मारे गए हैं। इस बीच तेहरान ने गुरुवार देर रात इजराइल की ओर कई राउंड मिसाइलें दागीं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल की राजधानी यरुशलम में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हमले के दौरान पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए। यह हमला ऐसे समय हुआ जब इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि ईरान जंग की आग में बुरी तरह तबाह हो चुका है। इसके तुरंत बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने साफ कर दिया कि संघर्ष अभी थमता नजर नहीं आ रहा है।

दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने कुवैत पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन अगर यह सही साबित होता है तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

इस युद्ध का असर अब सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका के भीतर भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के पारंपरिक राजनीतिक समर्थन समूह को छोड़कर अमेरिका के कई हिस्सों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने अमेरिका को मिडिल ईस्ट में एक और लंबे और महंगे युद्ध में धकेल दिया है।

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हालांकि दूसरी ओर, MAGA समर्थकों का एक बड़ा वर्ग अब भी ट्रंप के इस कदम के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है। बढ़ती तेल कीमतों, अनिश्चित परिणामों और अमेरिका को हो रहे नुकसान के बावजूद यह तबका इसे ताकत दिखाने वाली रणनीति मान रहा है। यही वजह है कि ईरान युद्ध अब सैन्य संघर्ष के साथ-साथ अमेरिका के अंदर भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

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अली मोहम्मद नैनी की मौत की खबर भी इसी संघर्ष को और गंभीर बना रही है। अगर ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के इतने अहम चेहरे के मारे जाने की पुष्टि होती है, तो यह ईरान की ओर से और अधिक आक्रामक जवाबी कार्रवाई की भूमिका तैयार कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मिसाइल, ड्रोन और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों का खतरा और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, ईरान-इजराइल जंग का 21वां दिन यह संकेत दे रहा है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सीमित सैन्य टकराव नहीं रहा। इसमें क्षेत्रीय राजनीति, वैश्विक तेल आपूर्ति, अमेरिकी आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सभी दांव पर लग चुकी हैं। फिलहाल दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर टिकी है, जहां हर बीतता दिन हालात को और विस्फोटक बनाता जा रहा है।

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