तेल के बढ़ते दाम और खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने बढ़ाई चिंता, RBI के 4% लक्ष्य के करीब पहुंची मुद्रास्फीति
नई दिल्ली: देश में महंगाई एक बार फिर बढ़ने लगी है। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई है। अप्रैल 2026 में यह दर 3.48 प्रतिशत थी। हालांकि राहत की बात यह है कि महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, लेकिन पिछले महीने की तुलना में आई बढ़ोतरी ने आम लोगों और नीति निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से साफ है कि खाद्य पदार्थों और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती कीमतों का असर अब उपभोक्ता महंगाई दर पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है।
बदला महंगाई मापने का तरीका
इस बार के आंकड़ों की तुलना पिछले वर्ष के मई महीने से सीधे नहीं की जा सकती। इसकी वजह यह है कि सरकार ने जनवरी 2026 से महंगाई मापने के आधार वर्ष में बदलाव किया है। अब वर्ष 2024 को नया आधार वर्ष बनाया गया है, जबकि पहले 2012 को आधार वर्ष माना जाता था। नया महंगाई सूचकांक वर्ष 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Household Consumption Expenditure Survey) पर आधारित है। सरकार का दावा है कि इससे देश में उपभोग के बदलते पैटर्न की अधिक सटीक तस्वीर सामने आएगी।
तेल की कीमतों का सीधा असर
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर परिवहन, उत्पादन और वितरण की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता है। विशेषज्ञ इसे “इंपोर्टेड इन्फ्लेशन” यानी आयातित महंगाई बताते हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
खाद्य महंगाई भी बढ़ा रही दबाव
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी धीरे-धीरे वृद्धि देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष अक्टूबर में खाद्य महंगाई दर घटकर माइनस 5.02 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जिसके कारण कुल महंगाई दर ऐतिहासिक रूप से 0.25 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी। लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो की आशंका और मानसून पर बने अनिश्चितता के बादल कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।
RBI ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान
महंगाई के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सतर्क रुख अपनाया है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था। हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा। केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति को “न्यूट्रल” बनाए रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर महंगाई और आर्थिक विकास दोनों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जा सकें।
मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था
महंगाई बढ़ने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई लगातार बढ़ती रही तो इसका असर उपभोक्ता खर्च, बचत और निवेश पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और RBI दोनों के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने की बड़ी चुनौती होगी।






