AI इम्पैक्ट समिट 2026 में UN प्रमुख एंतोनियो गुतारेस की चेतावनी, बोले– मानवता के लिए जिम्मेदार AI जरूरी
नई दिल्ली: राजधानी में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात की और वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने की अपील की। गुतारेस खास तौर पर समिट में भाग लेने भारत पहुंचे हैं, जहां उन्होंने दुनिया के सामने AI गवर्नेंस को लेकर कई अहम संदेश दिए।
“हम अंजान दिशा की ओर बढ़ रहे हैं” – गुतारेस
समिट में अंतरराष्ट्रीय AI गवर्नेंस पर बोलते हुए गुतारेस ने कहा कि AI का विकास रोशनी की गति से आगे बढ़ रहा है, जबकि इसे समझने की वैश्विक क्षमता अभी पीछे है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वैज्ञानिक आधार और विश्वसनीय तथ्यों के बनाई गई नीतियां मानवता के लिए खतरा बन सकती हैं। उनका कहना था कि देशों को मिलकर लोगों को तैयार करने, सुरक्षा देने और तकनीक में निवेश करने की जरूरत है।
संयुक्त राष्ट्र के नए AI पैनल का जिक्र
गुतारेस ने हाल ही में गठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक AI पैनल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसमें विज्ञान को AI सहयोग के केंद्र में रखा जाएगा। यह पैनल AI से जुड़े ज्ञान अंतर को कम करने और समाज तथा अर्थव्यवस्था पर इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 40 विशेषज्ञों के पैनल को मंजूरी दे दी है और जुलाई में होने वाले AI गवर्नेंस पर वैश्विक संवाद से पहले इसकी पहली रिपोर्ट पेश की जाएगी।
दुनिया भर के नेताओं की भागीदारी
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 110 से अधिक देशों, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कई राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया है। यह समिट “लोग, ग्रह और प्रगति” के तीन स्तंभों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य मानव-केंद्रित AI, पर्यावरणीय संतुलन और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
वैश्विक AI समिट की श्रृंखला का चौथा पड़ाव
यह शिखर सम्मेलन 2023 के यूके ब्लेचले पार्क AI सेफ्टी समिट, 2024 के सियोल समिट और 2025 के पेरिस AI एक्शन समिट के बाद चौथा वैश्विक आयोजन है। भारत ने फ्रांस समिट में सह-अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अब नई दिल्ली में आयोजित यह समिट ग्लोबल साउथ की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट के जरिए AI के सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी उपयोग को लेकर वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश तेज हुई है।






