अम्फान राहत कोष पर सियासी संग्राम: अभिषेक बनर्जी पर 200 करोड़ की कथित अनियमितता का आरोप, पुलिस में शिकायत दर्ज
पश्चिम बंगाल में फिर गरमाई अम्फान फंड की राजनीति, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर अम्फान चक्रवात राहत कोष का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अम्फान राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में नया घमासान शुरू हो गया है।
आरोप है कि अम्फान चक्रवात के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवंटित राशि के वितरण और उपयोग में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित दस्तावेज और तथ्यों को पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करने का दावा किया है।
अम्फान राहत कोष फिर बना राजनीतिक मुद्दा
साल 2020 में आए विनाशकारी अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। लाखों लोग प्रभावित हुए थे और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से राहत कार्यों के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई थी। उसी राहत कोष के उपयोग को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब अभिषेक बनर्जी का नाम सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि राहत राशि के वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ियां हुईं।
विपक्ष ने मांगी निष्पक्ष जांच
विपक्षी नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि राहत कोष में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो इसकी पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के लिए भेजी गई राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है।
टीएमसी ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। टीएमसी का दावा है कि अम्फान के दौरान राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और पुनर्वास कार्य किए थे और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई थीं। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी और राजनीतिक माहौल को देखते हुए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।
शिकायत के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद अब सभी की नजरें जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि मामले में प्राथमिक जांच शुरू होती है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष-सरकार के बीच बढ़ती टकराहट के बीच अम्फान राहत कोष का मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकता है।
फिलहाल शिकायत दर्ज होने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है और सभी पक्ष अपने-अपने दावों के साथ मैदान में उतर चुके हैं।






