रांची में IIT की मांग को नई धार, केंद्र से जल्द फैसले की उम्मीद
वर्षों पुरानी मांग फिर केंद्र के दरबार में
Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT की स्थापना की मांग पिछले कई वर्षों से उठती रही है। अब इस मांग को एक बार फिर राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर मजबूती मिली है। हाल ही में झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर राज्य में उच्च शिक्षा के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्ताव रखे।
IIT पर शीघ्र निर्णय का अनुरोध
मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में IIT स्थापित करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न और युवा आबादी वाले राज्य के लिए IIT जैसी शीर्ष तकनीकी संस्था बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने रांची में कौशल विश्वविद्यालय और फिनटेक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्र से करीब 800 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग भी रखी।
केंद्र–राज्य साझेदारी से शिक्षा को गति
मंत्री ने केंद्र सरकार से राज्य के हित में अपेक्षित सहयोग का अनुरोध करते हुए विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन संभव है। उनका कहना था कि IIT जैसे संस्थान राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर सकते हैं।
शिक्षाविदों ने बताया छात्रहित में जरूरी कदम
रांची के कई प्रमुख शिक्षाविदों ने भी राजधानी में IIT की स्थापना को छात्रहित में एक मजबूत और दूरगामी कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ झारखंड के छात्रों को फायदा होगा, बल्कि राज्य का संपूर्ण शैक्षणिक और आर्थिक इकोसिस्टम बदलेगा।
IIT खुलने से क्या-क्या होंगे फायदे
रांची में IIT की स्थापना से उच्च स्तरीय लैब, स्टार्टअप और फैकल्टी के नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट्स के जरिए रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, माइनिंग टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में झारखंड के संसाधनों के अनुकूल तकनीकी माहौल विकसित होगा।
इसके साथ ही उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जहां इनक्यूबेशन सेंटर युवाओं को इनोवेटिव व्यवसाय शुरू करने में मदद करेंगे। उद्योगों के साथ सहयोग से व्यावहारिक रिसर्च को गति मिलेगी और नए आइडियाज पेटेंट व उत्पादों में बदले जा सकेंगे। IIT ग्रेजुएट्स आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और भारी उद्योगों में कुशल कार्यबल की कमी को पूरा करेंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
IIT कैंपस के आसपास शिक्षा, रिसर्च और सहायक सेवाओं में नई नौकरियां पैदा होंगी, जिससे आर्थिक विकास को तेज रफ्तार मिलेगी।
IIIT रांची के निदेशक का नजरिया
IIIT रांची के निदेशक डॉ. राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि राजधानी रांची पहले से ही एक एजुकेशन हब के रूप में जानी जाती है। उन्होंने कहा,
“अगर रांची में IIT की स्थापना होती है तो यह शहर रिसर्च हब बन जाएगा। देश-विदेश के विशेषज्ञ यहां आएंगे, नया इकोसिस्टम बनेगा और इसका सीधा लाभ यहां के युवाओं को मिलेगा। IIT के लिए अलग से फंड आवंटित होते हैं, जिससे शिक्षा और अनुसंधान का नया प्रारूप सामने आएगा।”
डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य की राय
डोरंडा कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. राजकुमार शर्मा ने कहा कि IIT जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था से युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी। उनका कहना है,
“इससे मेधा के आधार पर नियुक्ति के अवसर बढ़ेंगे, रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और तकनीकी कौशल का लाभ पूरे राज्य को मिलेगा। बेहतर शोध से अन्य संस्थान भी प्रेरित होंगे।”
युवाओं और वंचित वर्ग के लिए अवसर
डोरंडा कॉलेज के कंप्यूटर साइंस विभाग के को-ऑर्डिनेटर डॉ. पप्पू कुमार रजक ने कहा कि IIT खुलने से झारखंड के युवाओं को बिना राज्य छोड़े विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी। उन्होंने बताया,
“लागत कम होगी, ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों से नामांकन बढ़ेगा। स्किल डेवलपमेंट, स्कॉलरशिप और कोचिंग सहायता से छात्र राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।”
सामाजिक-आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार
रांची विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सुनीता कुमारी का मानना है कि IIT की स्थापना से तकनीकी कौशल के साथ-साथ स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित होगा। उन्होंने कहा,
“विदेशी निवेश आकर्षित होगा, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को डिजिटल समाधान मिलेंगे, आईटी कंपनियों के आने से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा और रांची का सामाजिक-आर्थिक स्तर ऊंचा होगा।”
अब केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर रांची में IIT की स्थापना को लेकर राजनीतिक इच्छाशक्ति, शैक्षणिक समर्थन और सामाजिक अपेक्षाएं एकजुट होती दिख रही हैं। अब निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या झारखंड को वह संस्थान मिलेगा, जो राज्य के भविष्य की दिशा बदल सकता है।






